फिंगेश्वर। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बासीन में चारागाह की सरकारी जमीन पर अवैध खनन (illegal mining) का गंभीर आरोप लगा है। स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर व्यापक असंतोष देखा जा रहा है, जहाँ ग्राम पंचायत बासीन के पूर्व सरपंच राजू सोनी ने प्रशासन से उचित जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
चारागाह की जमीन पर खनन का आरोप
स्थानीय सूत्रों और शिकायतकर्ताओं के अनुसार, बासीन गांव की चारागाह (grazing land) की जमीन, जो सामुदायिक उपयोग के लिए आरक्षित है, पर कुछ लोगों द्वारा अवैध रूप से फर्श खदानों (floor mines) का संचालन किया जा रहा है। इस अवैध गतिविधि से न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि गांव के पशुपालकों और किसानों का आजीविका भी प्रभावित हो रहा है। आरोप यह भी है कि खनन का मलबा आसपास के क्षेत्रों में फैलाया जा रहा है, जिससे कृषि योग्य भूमि भी क्षतिग्रस्त हो रही है।
पूर्व सरपंच राजू सोनी ने की कार्यवाही की मांग
इस गंभीर मामले को लेकर ग्राम पंचायत बासीन के पूर्व सरपंच राजू सोनी सामने आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि लंबे समय से चल रहे इस अवैध खनन के बावजूद प्रशासनिक अधिकारी मौन दर्शक बने हुए हैं। राजू सोनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चारागाह की जमीन पर हो रहे इस अवैध उत्खनन को तुरंत रोका जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
कलेक्टर को दी गई लिखित शिकायत, फिर भी ठंडे बस्ते में मामला

लिखित शिकायत की कॉपी
पूर्व सरपंच राजू सोनी ने इस मामले में केवल मौखिक शिकायत ही नहीं की, बल्कि उन्होंने गरियाबंद जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत भी दी है। शिकायत में उन्होंने खनन क्षेत्र का सीमांकन (demarcation) कराने और उचित कानूनी कार्यवाही करने की मांग की है। हालांकि, शिकायत दिए जाने के बाद भी अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे स्थानीय लोग निराश हैं। लोग कह रहे हैं कि शिकायतें ‘ठंडे बस्ते’ में डाल दी गई हैं और अवैध खनन धड़ल्ले से जारी है।
मांग: सीमांकन और त्वरित जांच
स्थानीय निवासियों और पूर्व सरपंच की मुख्य मांग है कि संबंधित विभाग तुरंत खनन क्षेत्र का सीमांकन करे ताकि यह स्पष्ट हो सके कि खनन किस सीमा तक हो रहा है और क्या यह अवैध है। इसके अलावा, एक स्वतंत्र जांच टीम गठित कर इस मामले की गहराई से जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। यदि प्रशासन समय रहते कार्रवाई नहीं करता है, तो स्थानीय लोग आंदोलन का रास्ता अपनाने की चेतावनी दे रहे हैं।


