मैनपुर। बारिश के मौसम में ग्रामीण इलाकों की बदहाल सड़कों का असर अब सीधे स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने लगा है। मैनपुर क्षेत्र के डुमर पड़ाव और जांगड़ा के बीच खराब कच्ची सड़क पर महतारी एक्सप्रेस 102 का वाहन फंस गया। वाहन में डिलीवरी के बाद महिला और उसका नवजात शिशु मौजूद थे। वाहन के आगे नहीं बढ़ पाने के बाद महिला को बारिश के बीच नवजात को लेकर करीब 3 किलोमीटर तक पैदल चलकर घर पहुंचना पड़ा।
घटना ने ग्रामीण इलाकों में सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क की स्थिति ऐसी ही रही तो बारिश के मौसम में किसी गंभीर मरीज या गर्भवती महिला को समय पर अस्पताल पहुंचाना भी मुश्किल हो सकता है।
डिलीवरी के बाद घर छोड़ने जा रही थी महतारी एक्सप्रेस
महिला का अस्पताल में प्रसव हुआ था। डिलीवरी के बाद महतारी एक्सप्रेस 102 के माध्यम से महिला और उसके नवजात शिशु को जांगड़ा स्थित घर छोड़ने जा रहा था।
लेकिन डुमर पड़ाव और जांगड़ा के बीच बारिश से कच्ची सड़क की हालत बेहद खराब हो गई थी। कीचड़ और गड्ढों के कारण महतारी एक्सप्रेस का वाहन रास्ते में ही फंस गया। काफी प्रयास के बाद भी जब वाहन आगे नहीं बढ़ सका तो महिला को मजबूरी में वाहन से उतरना पड़ा।
बारिश के बीच महिला को नवजात शिशु के साथ करीब 3 किलोमीटर पैदल चलकर घर तक जाना पड़ा। इस दौरान महिला और बच्चा बारिश में भीगते रहे।
सड़क की बदहाली के चलते 3 किमी पैदल चलने की मजबूरी
ग्रामीणों के अनुसार, डुमर पड़ाव से जांगड़ा के बीच सड़क लंबे समय से खराब है। बारिश होते ही कच्चा रास्ता कीचड़ में बदल जाता है। जगह-जगह गड्ढे और दलदल जैसी स्थिति बन जाने से चारपहिया वाहनों का निकलना मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि सामान्य दिनों में किसी तरह आवागमन हो जाता है, लेकिन बारिश के दौरान स्थिति बेहद खराब हो जाती है। सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है, जब मरीज या गर्भवती महिला को वाहन से लाना-ले जाना पड़ता है।
नवजात बच्चे को लेकर प्रसव के बाद महिला का बारिश में करीब 3 किलोमीटर पैदल जाना इसी परेशानी का उदाहरण है।
दो साल से PMGSY सड़क का काम लंबित होने का दावा
ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत सड़क निर्माण का काम करीब दो साल से लंबित है। सड़क का निर्माण पूरा नहीं होने के कारण ग्रामीणों को आज भी कच्चे और खराब रास्ते से आवागमन करना पड़ रहा है।
बारिश ने इस कच्चे रास्ते की स्थिति को और बदतर कर दिया है। ग्रामीणों के मुताबिक, सड़क पर वाहन फंसने की समस्या लगातार बढ़ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण जल्द पूरा होने से न सिर्फ आवागमन आसान होगा, बल्कि महतारी एक्सप्रेस, एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों की गांव तक पहुंच भी सुनिश्चित हो सकेगी।
आपातकालीन वाहन भी गांव तक पहुंचने में हो रहे परेशान
ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ा सवाल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को लेकर है। यदि किसी गर्भवती महिला को अचानक अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़े या किसी मरीज की हालत गंभीर हो जाए तो खराब सड़क के कारण एंबुलेंस या अन्य आपातकालीन वाहन का गांव तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की खराब स्थिति केवल आवागमन की समस्या नहीं है, बल्कि यह आपात स्थिति में लोगों की जान के लिए भी खतरा बन सकती है।
मौके पर पहुंचे ग्रामीण, जनप्रतिनिधियों ने देखी स्थिति
महतारी एक्सप्रेस के कच्चे रास्ते में फंसने और महिला को नवजात के साथ पैदल जाने की घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय ग्रामीण मौके पर मौजूद रहे।
इस दौरान सरपंच अरविंद नेताम, उप सरपंच भानु प्रताप सिन्हा, जगबंधु, वेदराम यादव, गंगाराम विश्वकर्मा, डोमार, नागेश हेलर नेताम, संतोष, नागेश और लाल सिंह सहित अन्य ग्रामीण मौजूद थे।
स्थानीय लोगों ने सड़क की स्थिति को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि बारिश के दौरान गांव तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से सड़क निर्माण कार्य को जल्द पूरा कराने तथा तब तक आवागमन के लिए रास्ते को दुरुस्त कराने की मांग की है।
ग्रामीणों की मांग—स्थायी पक्की सड़क बने, बारिश में न रुके स्वास्थ्य सेवाओं का रास्ता
ग्रामीणों का कहना है कि गांव के लोगों को लंबे समय से पक्की सड़क का इंतजार है। बरसात के दौरान खराब सड़क के कारण बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है।
अब ग्रामीण चाहते हैं कि लंबित सड़क निर्माण कार्य को जल्द शुरू कर पूरा कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रसूता महिला या गंभीर मरीज को बारिश के बीच पैदल चलने की मजबूरी न हो।
महतारी एक्सप्रेस के रास्ते में फंसने और प्रसव के बाद महिला के नवजात को लेकर करीब तीन किलोमीटर पैदल जाने की घटना ने ग्रामीण सड़क व्यवस्था की उस हकीकत को सामने ला दिया है, जहां सरकारी स्वास्थ्य वाहन गांव तक पहुंच तो जाता है, लेकिन खराब सड़क के कारण मरीज को उसके घर तक पहुंचाना भी चुनौती बन जाता है।
ग्रामीणों का सवाल सीधा है—जब बारिश में सड़क पर वाहन ही नहीं चल पा रहे, तो आपातकालीन स्थिति में गांव तक स्वास्थ्य सेवाएं कैसे पहुंचेंगी?



