मैनपुर। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के कुल्हाड़ीघाट रेंज में वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बेहद दुर्लभ और रोमांचक दृश्य देखने को मिला। यहां एक विशाल वृक्ष पर चढ़कर एक भालू मधुमक्खियों के छत्ते से शहद खाते हुए नजर आया। जंगल के बीच प्राकृतिक वातावरण में भालू का यह व्यवहार वन्यजीवों की स्वाभाविक जीवनशैली और समृद्ध जैव विविधता का अनूठा उदाहरण माना जा रहा है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भालू बड़ी सहजता से पेड़ पर चढ़ा और मधुमक्खियों के छत्ते तक पहुंचकर काफी देर तक शहद का आनंद लेता रहा। इस दौरान वह मधुमक्खियों की परवाह किए बिना अपनी मजबूत पकड़ और संतुलन के साथ पेड़ की ऊंची शाखाओं पर बना रहा।
स्लॉथ भालू (रीछ) का प्रमुख भोजन दीमक, चींटियां, फल, महुआ, जामुन और शहद भी होता है। प्राकृतिक जंगलों में भालुओं का मधुमक्खियों के छत्तों तक पहुंचकर शहद खाना उनके स्वाभाविक व्यवहार का हिस्सा है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व घने वनों और समृद्ध वन्यजीव विविधता के लिए जाना जाता है, जहां भालू, तेंदुआ, जंगली भैंसा, धोल (जंगली कुत्ता) सहित अनेक वन्यजीव पाए जाते हैं।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के दृश्य यह साबित करते हैं कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व का प्राकृतिक आवास अब भी वन्यजीवों के लिए अनुकूल बना हुआ है। हालांकि जंगल में भ्रमण करने वाले पर्यटकों और ग्रामीणों से अपील की गई है कि वन्यजीव दिखाई देने पर उनसे सुरक्षित दूरी बनाए रखें और किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या नजदीक जाने का प्रयास न करें।
कुल्हाड़ीघाट रेंज में इस तरह का दृश्य बहुत कम देखने को मिलता है। पेड़ की ऊंचाई पर बैठकर शहद का स्वाद लेता भालू जंगल की प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवन की अनूठी झलक प्रस्तुत कर रहा था।

