मैनपुर: विकासखंड मुख्यालय मैनपुर के राजापड़ाव क्षेत्र स्थित ग्राम कोकड़ी में मूलनिवासियों का एक बड़ा जनसैलाब उमड़ा। जय अंबेडकरवादी युवा संगठन और किसान संघर्ष समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस ऐतिहासिक बैठक में हजारों की संख्या में मूलनिवासी, किसान, महिलाएं, युवा, जनप्रतिनिधि और ग्राम सभा के पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में सभी ने एकजुट होकर जल, जंगल, जमीन, और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष करने की सामूहिक शपथ ली।
बैठक की शुरुआत संविधान निर्माता डॉ. बी.आर. अंबेडकर के चित्र पर माल्यार्पण और स्थानीय देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना के साथ हुई। इस दौरान क्षेत्रवासियों ने पेसा (PESA) कानून और वनाधिकार अधिनियम, 2006 के क्रियान्वयन में हो रही प्रशासनिक लापरवाही को लेकर शासन-प्रशासन पर जमकर भड़ास निकाली।
वन विभाग की मनमानी और पट्टों में देरी से आक्रोश
बैठक में उपस्थित लोगों ने आरोप लगाया कि गांव-गांव में पेसा और वनाधिकार समितियां बनी हुई हैं, इसके बावजूद वन विभाग ग्राम सभाओं को विश्वास में लिए बिना मनमाने ढंग से काम कर रहा है। वक्ताओं ने कहा:
वनाधिकार पट्टों में देरी: 8-10 साल पहले पट्टों के लिए आवेदन करने और ग्राम सभा की सारी प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद लोगों को आज तक पट्टे नहीं मिले हैं। प्रशासन “दो साक्ष्य” और “2005 की सैटेलाइट इमेजरी” का हवाला देकर लगातार दावे निरस्त कर रहा है।
हम रक्षक हैं: ग्रामीणों ने कहा, “खेतों में महुआ और कुसुम के पेड़ इस बात का प्रमाण हैं कि हमारे पूर्वजों ने जंगलों को बचाया है। हम स्वतंत्रता से पहले से इस धरती पर रह रहे हैं और हम ही इसके असली संरक्षक हैं।”
परिसीमन का विरोध: वन विभाग द्वारा किए गए सीमांकन का भी विरोध किया गया। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी पारंपरिक देव-सीमा को ही मानेंगे और बिना ग्राम सभा की सहमति के कोई काम नहीं होने दिया जाएगा।
बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर उठी आवाज़
अधिकारों के अलावा क्षेत्र की बदहाल मूलभूत सुविधाओं पर भी गंभीर चिंता जताई गई:
मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के तहत भवन अधूरे पड़े हैं।
स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है और जो हैं, वे समय पर नहीं आते।
नल-जल योजना और सोलर सिस्टम पूरी तरह से ठप हैं।
आदिम जाति सेवा सहकारी समिति (शोभा) में किसानों को भारी परेशानियां हो रही हैं। सुशासन तिहार में कलेक्टर द्वारा पर्यवेक्षक त्रिलोक सेन को हटाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
प्रशासन को 7 दिन का अल्टीमेटम
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 03 जुलाई को एसडीएम (मैनपुर) को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा जाएगा। प्रशासन को 7 दिन का अल्टीमेटम दिया गया है कि वे क्षेत्र में आकर ग्राम सभा अध्यक्षों, वनाधिकार समितियों और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर समस्याओं का ठोस समाधान निकालें।
“अगर 7 दिन में हल नहीं निकला, तो हम लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से एसडीएम कार्यालय का घेराव करने को मजबूर होंगे,” क्षेत्रवासियों ने स्पष्ट चेतावनी दी।
प्रमुख वक्ताओं के विचार:
संजय नेताम (जिला पंचायत सदस्य): “संविधान, पेसा और वनाधिकार कानून ने हमें जो अधिकार दिए हैं, उन्हें लागू कराना शासन की जिम्मेदारी है। जब तक ये धरातल पर लागू नहीं होंगे, हमारा संघर्ष जारी रहेगा।”
घनश्याम मरकाम (सरपंच, शोभा): “हम अपने समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट हैं। समस्याओं के समाधान तक हम पीछे नहीं हटेंगे।”
पतंग मरकाम (अध्यक्ष, जय अंबेडकरवादी युवा संगठन): “शासन लगातार राजापड़ाव क्षेत्र की उपेक्षा कर रहा है। अब मूलनिवासी अपने अधिकारों के लिए निर्णायक संघर्ष करेगा।”
ऐतिहासिक सामूहिक शपथ: कार्यक्रम के अंत में उपस्थित हजारों लोगों ने शपथ ली— “हम जल, जंगल, जमीन, अपनी पारंपरिक संस्कृति और संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों की रक्षा करेंगे और इसके लिए कभी पीछे नहीं हटेंगे।”
बैठक में रमेश मरकाम, पूरन मेश्राम (प्रवक्ता), नकुल नागेश (सचिव), चिमन नेताम, शंकर लाल नेताम सहित सैकड़ों प्रमुख लोग और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।





