मैनपुर (शोभा) | राज्य में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ ‘समग्र शिक्षा’ के तमाम दावों की जमीनी हकीकत बेहद चौंकाने वाली है। गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम शोभा से शिक्षा विभाग की घोर लापरवाही का एक ऐसा मामला सामने आया है, जो प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यहाँ के ‘शासकीय कन्या पूर्व माध्यमिक आश्रम शाला’ में सैकड़ों छात्र – छात्राओं का भविष्य भगवान भरोसे है, क्योंकि पूरे स्कूल को संभालने के लिए मात्र एक ही शिक्षक मौजूद है।
विषयों का अंबार, शिक्षक केवल एक , शोभा के इस हिंदी माध्यम स्कूल में कक्षा 6वीं से लेकर 8वीं तक की कक्षाएं संचालित होती हैं। शिक्षा के पाठ्यक्रम को देखें तो कक्षा 6वीं में 7 विषय, कक्षा 7वीं में 6 विषय और कक्षा 8वीं में 6 विषय निर्धारित हैं। यानी कुल मिलाकर इन बच्चियों को 19 विषय पढ़ने होते हैं। लेकिन सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इन सभी 19 विषयों को पढ़ाने और तीनों कक्षाओं के सैकड़ों बच्चों को संभालने के लिए स्कूल में सिर्फ और सिर्फ एक ही शिक्षक की नियुक्ति की गई है।
कागजी काम निपटाएं या बच्चों को पढ़ाएं? यह स्थिति अब एक बड़ा और चिंतनीय विषय बन गई है। सवाल यह उठता है कि एक अकेला शिक्षक स्कूल के आधिकारिक और कागजी कामकाज (स्टाफ के कार्य) को निपटाए या फिर कक्षाओं में जाकर सैकड़ों बच्चियों को शिक्षा दे? एक ही समय में तीन अलग-अलग कक्षाओं को सुचारू रूप से संचालित करना और 19 विषयों के साथ न्याय करना किसी भी एक व्यक्ति के लिए व्यावहारिक रूप से पूरी तरह असंभव है।
छात्र – छात्राओं का भविष्य दांव पर शिक्षक की इस भारी कमी के कारण स्कूल में पढ़ने वाली बच्चियों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। एक तरफ सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ शोभा के इस स्कूल में बुनियादी संसाधनों और शिक्षकों का ही टोटा पड़ा हुआ है। इस लचर व्यवस्था को लेकर अभिभावकों और स्थानीय ग्रामीणों में गहरी चिंता और रोष है। अब यह देखना लाजमी होगा कि इस खबर के बाद क्या शिक्षा विभाग कुंभकर्णी नींद से जागकर यहाँ पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था करता है, या फिर बेटियों का भविष्य यूँ ही अंधकार में धकेला जाता रहेगा।





