मुड़ागांव: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से फर्जीवाड़े और प्रशासन को गुमराह करने का एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिले के ग्राम पंचायत मुड़ागांव में दस्तावेजों में हेराफेरी कर सरकारी नौकरी प्राप्त करने का आरोप लगा है। यह सनसनीखेज आरोप पंचायत के ही उपसरपंच ख़िरसिंधु नागेश ने लगाया है, जिसके बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला? उपसरपंच ख़िरसिंधु नागेश ने ग्राम पंचायत मुड़ागांव के पूर्व ग्राम रोजगार सहायक ‘उधोराम नागेश’ पर सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि उन्होंने फर्जी विकलांग (दिव्यांग) प्रमाण पत्र का सहारा लेकर रोजगार सहायक का पद हथियाया था।
उपसरपंच का कहना है कि उधोराम नागेश ने जानबूझकर फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए और शासन-प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर नौकरी प्राप्त की। उपसरपंच ने दावा करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि, “उधोराम नागेश शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ हैं और वह किसी भी एंगल से दिव्यांग (विकलांग) नजर नहीं आते हैं।”

पंचायत और प्रशासन में मचा हड़कंप एक जनप्रतिनिधि (उपसरपंच) द्वारा पूर्व सरकारी कर्मचारी पर सरेआम ऐसे गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद से ग्राम पंचायत और स्थानीय महकमे में खलबली मच गई है। ग्रामीण भी इस बात को लेकर हैरान हैं कि आखिर कैसे कोई व्यक्ति फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर प्रशासन की जांच प्रणाली से बचकर नौकरी पा सकता है।

उच्च अधिकारियों से होगी मामले की शिकायत इस पूरे फर्जीवाड़े को उजागर करने के बाद उपसरपंच ख़िरसिंधु नागेश ने पीछे न हटने का फैसला किया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि वह इस मामले को सिर्फ पंचायत स्तर तक सीमित नहीं रखेंगे।
उपसरपंच ने कहा है कि वह पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए जिले के उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर अवगत कराएंगे। उनकी मांग है कि इस फर्जी विकलांग प्रमाण पत्र की मेडिकल बोर्ड से दोबारा जांच कराई जाए, और यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो प्रशासन को गुमराह करने के आरोप में पूर्व रोजगार सहायक पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
इस खबर के मुख्य बिंदु :
स्थान: ग्राम पंचायत मुड़ागांव, गरियाबंद।
आरोप लगाने वाले: उपसरपंच ख़िरसिंधु नागेश।
आरोपी: पूर्व ग्राम रोजगार सहायक उधोराम नागेश।
मुख्य आरोप: फर्जी विकलांग प्रमाण पत्र बनवाकर और प्रशासन को गुमराह करके नौकरी हथियाना।
अगला कदम: मामले की उच्च स्तरीय जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत करने की तैयारी।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि उपसरपंच की शिकायत के बाद गरियाबंद जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और जांच में क्या सच्चाई निकलकर सामने आती है।





