रायगढ़। जिले में प्रस्तावित सिंघल स्टील परियोजना को लेकर प्रभावित क्षेत्र के गांवों में चर्चा और विरोध का माहौल लगातार बढ़ता जा रहा है। जनसुनवाई की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ग्रामीणों ने विभिन्न गांवों में बैठक कर भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास, रोजगार और पर्यावरणीय प्रभावों से जुड़े मुद्दों पर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट की शुरुआत से पहले प्रभावित परिवारों को परियोजना की पूरी और स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए। उनका सवाल है कि यदि किसानों की जमीन अधिग्रहित की जाती है तो भविष्य में स्थानीय लोगों के हितों और अधिकारों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी।
बैठकों में ग्रामीणों ने भूमि अधिग्रहण को लेकर भी असमंजस की स्थिति जताई। उनका कहना है कि क्षेत्र में पहले भी कई औद्योगिक परियोजनाओं की घोषणाएं हुई थीं, इसलिए इस परियोजना की समयसीमा, निवेश और रोजगार से संबंधित योजनाओं को लेकर स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
स्थानीय लोगों ने रोजगार और पुनर्वास को सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। ग्रामीणों की मांग है कि यदि परियोजना स्थापित होती है तो प्रभावित परिवारों के युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार दिया जाए। साथ ही उचित मुआवजा, पुनर्वास और सामाजिक सुरक्षा की नीति को स्पष्ट रूप से सार्वजनिक किया जाए।
पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर भी ग्रामीणों ने चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि क्षेत्र में बढ़ते औद्योगीकरण के बीच पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। किसी भी नई परियोजना से पहले प्रदूषण, जल स्रोतों, वन क्षेत्र और कृषि पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का विस्तृत अध्ययन सार्वजनिक किया जाना आवश्यक है।
आगामी जनसुनवाई को लेकर प्रभावित गांवों में लगातार बैठकें आयोजित की जा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे जनसुनवाई के दौरान प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी बात मजबूती से रखेंगे तथा परियोजना से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर स्पष्ट जवाब मांगेंगे।
फिलहाल जनसुनवाई से पहले क्षेत्र में परियोजना को लेकर चर्चा तेज हो गई है और स्थानीय लोग अपने अधिकारों, आजीविका और भविष्य को लेकर सजग नजर आ रहे हैं। अब सभी की निगाहें आगामी जनसुनवाई और प्रशासन की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।



