गरियाबंद/देवभोग। लोगों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग NH-130C के किनारे लगाए गए क्रैश बैरियर (गार्ड रेल) अब कई स्थानों पर खुद हादसों का कारण बनते दिखाई दे रहे हैं। सड़क किनारे सुरक्षा के उद्देश्य से लगाए गए ये लोहे के बैरियर लंबे समय से देखरेख और मरम्मत के अभाव में जर्जर हो चुके हैं, जिससे वाहन चालकों की चिंता बढ़ गई है। क्रैश बैरियर का उद्देश्य दुर्घटना की स्थिति में वाहन को सड़क से नीचे गिरने या अनियंत्रित होने से बचाना होता है, लेकिन खराब रखरखाव इन्हें जानलेवा बना सकता है।
NH-130C, जो अभनपुर, राजिम, गरियाबंद और देवभोग ( ओडिसा ) क्षेत्र को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग है, कई हिस्सों में घने जंगल, अंधे मोड़ और सिंगल लेन सड़क से होकर गुजरता है। ऐसे संवेदनशील स्थानों पर लगे कई क्रैश बैरियर अब टूटे, उखड़े और टेढ़े दिखाई देते हैं। कई जगहों पर तो बैरियर सड़क किनारे उखाड़कर फेंक दिए गए हैं, जबकि कुछ स्थानों पर उनके नुकीले हिस्से खुले पड़े हैं, जो दुर्घटना के समय गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब से इन बैरियरों की स्थापना हुई है, उसके बाद विभाग द्वारा शायद ही कभी इनकी नियमित जांच या मरम्मत कराई गई हो। बारिश, जंग और लगातार हो रही दुर्घटनाओं के कारण कई हिस्सों की स्थिति खराब हो चुकी है। रात के समय या ओवरटेकिंग के दौरान वाहन चालक इन क्षतिग्रस्त बैरियरों को समय पर देख नहीं पाते, जिससे बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है।
सड़क सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञ भी मानते हैं कि क्रैश बैरियर तभी प्रभावी होते हैं जब उनकी नियमित निगरानी, मरम्मत और सही इंस्टॉलेशन किया जाए। गलत ऊंचाई, ढीले पोल, टूटे हिस्से और रखरखाव की कमी दुर्घटनाओं को और अधिक गंभीर बना सकती है।
NH-130C के कई हिस्सों में सड़क संकरी होने और अंधे मोड़ों की वजह से वाहन चालकों को पहले ही काफी सतर्कता बरतनी पड़ती है। ऐसे में खराब और क्षतिग्रस्त क्रैश बैरियर सुरक्षा के बजाय मौत का इंतजार करते दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय नागरिकों ने संबंधित विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से मांग की है कि पूरे मार्ग का सुरक्षा ऑडिट कराया जाए तथा टूटे और उखड़े बैरियरों को तत्काल बदला जाए।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुधार कार्य नहीं हुआ तो भविष्य में बड़े सड़क हादसे हो सकते हैं। सड़क सुरक्षा केवल निर्माण तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसकी लगातार निगरानी और रखरखाव भी उतना ही जरूरी है।

