राधे पटेल / गरियाबंद कोलकाता/पश्चिम बंगाल:
West Bengal Election Security को लेकर बड़ी तैयारी शुरू हो गई है। आगामी चुनावों को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाने के लिए Election Commission of India ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में 19 अप्रैल को Kolkata में देश के शीर्ष केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के महानिदेशक (DG) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

बैठक में Central Reserve Police Force, Border Security Force, Central Industrial Security Force, Sashastra Seema Bal और Indo-Tibetan Border Police के प्रमुख शामिल हुए। इस बैठक में West Bengal Election Security को लेकर विस्तृत रणनीति तैयार की गई।
West Bengal Election Security के तहत दो चरणों में मतदान
West Bengal Election Security के मद्देनजर मतदान 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को दो चरणों में कराया जाएगा। इस बार करीब 2.4 लाख जवानों की तैनाती की जाएगी, जो वर्ष 2021 के चुनावों की तुलना में लगभग दोगुनी है।
चुनाव आयोग का मुख्य उद्देश्य यह है कि हर मतदाता बिना किसी डर के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके। पिछले चुनावों की हिंसा के बाद बढ़ाई गई सुरक्षा

गौरतलब है कि West Bengal Assembly Election 2021 के दौरान कई स्थानों पर हिंसा और बूथ कब्जे की घटनाएं सामने आई थीं। इन घटनाओं से सबक लेते हुए इस बार West Bengal Election Security को पहले से अधिक मजबूत बनाया गया है।
मतदान के बाद ईवीएम मशीनों को सुरक्षित रखने के लिए बनाए गए स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा भी केंद्रीय बलों के जिम्मे रहेगी।
संवेदनशील बूथों पर विशेष निगरानी
West Bengal Election Security योजना के तहत संवेदनशील और अतिसंवेदनशील मतदान केंद्रों की पहचान की जा चुकी है। इन स्थानों पर अतिरिक्त केंद्रीय बल तैनात किए जाएंगे। साथ ही चुनाव से पहले फ्लैग मार्च और लगातार गश्त की जाएगी।
राजनीतिक बयानबाजी भी हुई तेज
इतने बड़े सुरक्षा इंतजाम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
All India Trinamool Congress (TMC) ने आरोप लगाया है कि भारी संख्या में केंद्रीय बलों की तैनाती Bharatiya Janata Party (BJP) की रणनीति हो सकती है।
वहीं अन्य दलों और विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम निष्पक्ष चुनाव के लिए आवश्यक है।

कुल मिलाकर West Bengal Election Security को लेकर इस बार प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। रिकॉर्ड संख्या में केंद्रीय बलों की तैनाती से संकेत मिलता है कि चुनाव आयोग किसी भी प्रकार की हिंसा या गड़बड़ी को रोकने के लिए पूरी तरह तैयार है।


