लो वोल्टेज की समस्या आज मैनपुर विकासखंड के ग्रामीणों और किसानों के लिए एक बड़ी मुसीबत बन गई है। अभी तो भीषण गर्मी का मौसम ठीक से शुरू भी नहीं हुआ है, लेकिन बिजली विभाग की लापरवाही ने लोगों के नाक में दम कर दिया है। जहाँ एक ओर सरकार और विभाग बेहतर बिजली आपूर्ति के बड़े-बड़े दावे करते हैं, वहीं जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। मैनपुर क्षेत्र के गांवों में कहीं बिजली गुल होने की समस्या है, तो कहीं लो वोल्टेज की समस्या के कारण लोगों के घरों के उपकरण शो-पीस बनकर रह गए हैं। सबसे बुरा हाल उन किसानों का है, जिन्होंने बिजली विभाग के भरोसे अपनी मेहनत की कमाई खेतों में लगा दी है।
गर्मी की आहट और बिजली का संकट

मार्च का महीना अभी खत्म भी नहीं हुआ है और सूरज की तपिश बढ़ने लगी है। आमतौर पर बिजली की मांग मई-जून के महीनों में बढ़ती है, लेकिन मैनपुर में हालत यह है कि अभी से ही वोल्टेज का ग्राफ गिरना शुरू हो गया है। लो वोल्टेज की समस्या इतनी गंभीर है कि घरों में लगे पंखे तक नहीं घूम पा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शाम होते ही बल्ब की रोशनी इतनी कम हो जाती है कि बच्चों को पढ़ाई करने में भी दिक्कत होती है।
हैरानी की बात यह है कि अभी तो कूलर और एयर कंडीशनर (AC) का उपयोग पूरी तरह शुरू भी नहीं हुआ है। यदि अभी यह हाल है, तो आने वाले दो महीनों में जब तापमान 45 डिग्री के पार जाएगा, तब ग्रामीणों का क्या होगा?
किसानों की सूखती फसलें और बढ़ती चिंता
मैनपुर एक कृषि प्रधान क्षेत्र है और यहाँ के किसानों ने सिंचाई के लिए पूरी तरह से बिजली पंपों पर भरोसा किया है। धान और अन्य रबी फसलों को इस वक्त पानी की सबसे ज्यादा जरूरत है। लेकिन लो वोल्टेज की समस्या के कारण पानी के पंप (Motors) लोड नहीं ले पा रहे हैं।

जलने का डर: लो वोल्टेज में मोटर चलाने से उनके जलने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे किसानों पर आर्थिक बोझ पड़ता है।
सिंचाई में बाधा: पानी न मिलने के कारण खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं। किसानों का कहना है कि उन्होंने कर्ज लेकर खाद और बीज खरीदे थे, लेकिन अब फसल आंखों के सामने दम तोड़ रही है।
विभागीय चुप्पी: किसानों ने कई बार बिजली ऑफिस के चक्कर लगाए, लेकिन हर बार उन्हें ‘जल्द ठीक होने’ का आश्वासन देकर लौटा दिया जाता है।
स्मार्ट मीटर का ‘करंट’ और भारी-भरकम बिल
एक तरफ लो वोल्टेज की समस्या से घर रोशन नहीं हो पा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बिजली बिलों ने लोगों के होश उड़ा दिए हैं। सरकार द्वारा लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। मैनपुर के कई ग्रामीणों का कहना है कि उनके घर में सिर्फ 2-3 बल्ब जलते हैं, फ्रिज या कूलर जैसा कोई बड़ा उपकरण नहीं है, फिर भी उनका बिल 1000 रुपये से ऊपर आ रहा है।

यह बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाता है। जब वोल्टेज कम है और बिजली की खपत न्यूनतम है, तो बिल इतना ज्यादा कैसे आ सकता है? ऐसा लगता है जैसे विभाग किसानों और गरीब ग्रामीणों की कमर तोड़ने पर तुला हुआ है।
बिजली गुल और मेंटेनेंस के नाम पर खानापूर्ति
सिर्फ लो वोल्टेज ही नहीं, बल्कि ‘बिजली गुल’ होना भी यहाँ की दिनचर्या बन गई है। बिना किसी पूर्व सूचना के घंटों तक बिजली काट दी जाती है। विभाग इसे अक्सर ‘मेंटेनेंस’ का नाम देता है, लेकिन सवाल यह है कि यदि हर दूसरे दिन मेंटेनेंस होता है, तो फिर लो वोल्टेज की समस्या क्यों बनी हुई है? क्या पुराने तारों और जर्जर ट्रांसफार्मरों को बदलने के लिए फंड नहीं है, या फिर अधिकारियों की इच्छाशक्ति की कमी है?
क्या कहते है जिम्मेदार..
बिजली विभाग के अफसर एस के बंजारे (ए ई ) का कहना है की जहा-जहा पर लो वॉल्टेज की समस्या जहा-जहा पर आ रही है वहा मैं चेक करवा लेता हूँ!
जिम्मेदार कौन और समाधान क्या?
मैनपुर की जनता अब जवाब चाहती है। बिजली विभाग के कर्मचारी और अधिकारी अक्सर ओवरलोड का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ लेते हैं। लेकिन समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
नए ट्रांसफार्मर की आवश्यकता: बढ़ती आबादी और लोड के अनुसार नए और उच्च क्षमता वाले ट्रांसफार्मर लगाने की जरूरत है।
जर्जर तारों का बदलना: कई जगहों पर एल्युमिनियम के पतले तार लगे हैं जो लोड नहीं सह पाते, उन्हें बदलना अनिवार्य है।
बिलिंग की पारदर्शिता: स्मार्ट मीटर की रीडिंग और बिलिंग प्रक्रिया की जाँच होनी चाहिए ताकि आम आदमी को लूट से बचाया जा सके।
मैनपुर में लो वोल्टेज की समस्या अब केवल एक तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि एक मानवीय संकट बनती जा रही है। किसान अपनी फसलों को लेकर परेशान है, तो मध्यम वर्ग भारी बिजली बिलों के नीचे दबा जा रहा है। यदि विभाग ने समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया, तो गर्मी का पीक सीजन आने तक स्थिति अनियंत्रित हो सकती है। प्रशासन को चाहिए कि वह अपनी आँखों से ‘पट्टी’ हटाए और मैनपुर के किसानों व ग्रामीणों को इस अंधेरे और आर्थिक शोषण से मुक्ति दिलाए।

