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    Home»अपराध / हादसा»Ramavatar Jaggi Murder Case Reopen: बिलासपुर हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू, 1 अप्रैल को फाइनल हियरिंग
    अपराध / हादसा

    Ramavatar Jaggi Murder Case Reopen: बिलासपुर हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू, 1 अप्रैल को फाइनल हियरिंग

    Ramavatar Jaggi Murder Case Reopen: क्या है 21 साल पुराना पूरा मामला?
    Radheshyam PatelBy Radheshyam Patel25/03/2026
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    बिलासपुर: छत्तीसगढ़ की राजनीति को हिला देने वाला 21 साल पुराना Ramavatar Jaggi Murder Case Reopen हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद अब बिलासपुर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस मामले पर दोबारा सुनवाई शुरू कर दी है। बुधवार को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच में इस हाई-प्रोफाइल मामले की विस्तृत सुनवाई हुई, जिसमें पीड़ित पक्ष से सतीश जग्गी भी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 1 अप्रैल को अंतिम सुनवाई (Final Hearing) की तारीख तय की है।

    सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से दोबारा खुला केस

    Ramavatar Jaggi Murder Case Reopen होने के पीछे सुप्रीम कोर्ट का वह अहम आदेश है, जिसमें सीबीआई (CBI) की अपील को स्वीकार किया गया था। दरअसल, करीब दो साल पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस हत्याकांड के दोषियों की अपीलों को खारिज करते हुए उनकी आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था। हालांकि, सीबीआई और सतीश जग्गी ने इस मामले के कुछ पहलुओं और आरोपियों की दोषमुक्ति के खिलाफ देश की सबसे बड़ी अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

    सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि मामले के मेरिट और तथ्यों पर विस्तार से सुनवाई की आवश्यकता है, जिसके बाद केस को वापस छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट रेफर किया गया। अब हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच इस पर नए सिरे से कानूनी बारीकियों को परखेगी।


    क्या था 2003 का चर्चित जग्गी हत्याकांड?

    4 जून 2003 की वह रात छत्तीसगढ़ की सियासत में ‘ब्लैक डे’ के रूप में जानी जाती है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के कद्दावर नेता और कोषाध्यक्ष रामावतार जग्गी की रायपुर में सरेराह गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जग्गी उस समय के दिग्गज नेता विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी माने जाते थे।

    इस हत्याकांड ने तत्कालीन अजीत जोगी सरकार की चूलें हिला दी थीं। जांच के दौरान पुलिस पर पक्षपात के आरोप लगे, जिसके बाद मामला सीबीआई को सौंपा गया। सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी समेत 31 लोगों को आरोपी बनाया था।

    दोषी और बरी हुए आरोपियों का गणित

    • कुल अभियुक्त: 31 लोग।

    • सरकारी गवाह: बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह।

    • सजा: 28 लोगों को विशेष अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

    • अमित जोगी का पक्ष: 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था। इसी बरी किए जाने के खिलाफ सतीश जग्गी ने कानूनी लड़ाई जारी रखी है।


    सतीश जग्गी का आरोप: ‘प्रायोजित थी हत्या’

    हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सतीश जग्गी के वकील बीपी शर्मा ने बेहद कड़े तर्क पेश किए। उन्होंने अदालत को बताया कि Ramavatar Jaggi Murder Case Reopen करना इसलिए जरूरी था क्योंकि यह महज एक सामान्य अपराध नहीं, बल्कि तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा ‘प्रायोजित’ हत्या थी।

    वकील ने आरोप लगाया कि जब सीबीआई ने जांच शुरू की, तब सरकारी तंत्र का प्रभाव इतना अधिक था कि महत्वपूर्ण सबूतों को नष्ट कर दिया गया था। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसे मामलों में जहां सत्ता और षड्यंत्र शामिल हो, वहां केवल प्रत्यक्ष सबूतों की कमी के आधार पर मुख्य आरोपियों को दोषमुक्त नहीं किया जा सकता। षड्यंत्र की कड़ियों को जोड़ना न्याय के लिए अनिवार्य है।


    सियासी समीकरण और हत्याकांड का कनेक्शन

    रामावतार जग्गी की हत्या के समय छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव नजदीक थे। उस समय के राजनीतिक हालात कुछ इस प्रकार थे:

    1. अजीत जोगी बनाम विद्याचरण शुक्ल: कांग्रेस के भीतर अंदरूनी कलह चरम पर थी। विद्याचरण शुक्ल मुख्यमंत्री बनना चाहते थे, लेकिन आलाकमान ने जोगी को चुना।

    2. NCP का उदय: नाराज होकर शुक्ल ने NCP जॉइन कर ली और जग्गी को मुख्य जिम्मेदारी सौंपी।

    3. वर्चस्व की जंग: जग्गी की हत्या से ठीक पहले NCP की एक विशाल रैली होने वाली थी, जिसमें शरद पवार शामिल होने वाले थे। माना जाता है कि NCP की बढ़ती लोकप्रियता से तत्कालीन सत्ताधारी दल असुरक्षित महसूस कर रहा था।


    अब आगे क्या होगा?

    Ramavatar Jaggi Murder Case Reopen होने से उन 28 दोषियों की धड़कनें भी बढ़ गई हैं जो फिलहाल सजा काट रहे हैं या जमानत पर हैं। साथ ही, अमित जोगी के लिए भी यह कानूनी चुनौती बढ़ सकती है। 1 अप्रैल को होने वाली फाइनल हियरिंग में हाईकोर्ट दोनों पक्षों की दलीलों को सुनकर यह तय करेगा कि क्या अमित जोगी को बरी करने का निचली अदालत का फैसला सही था या इसमें किसी बड़े षड्यंत्र की अनदेखी हुई थी।

    छत्तीसगढ़ की जनता और राजनीतिक गलियारों की नजरें अब बिलासपुर हाईकोर्ट पर टिकी हैं। क्या 21 साल बाद जग्गी परिवार को पूर्ण न्याय मिलेगा? इसका फैसला आने वाले कुछ हफ्तों में साफ हो जाएगा।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न):

    Q1. रामावतार जग्गी कौन थे?

    A: रामावतार जग्गी छत्तीसगढ़ में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के कोषाध्यक्ष और दिग्गज नेता विद्याचरण शुक्ल के करीबी सहयोगी थे।

    Q2. जग्गी हत्याकांड कब हुआ था?

    A: रामावतार जग्गी की हत्या 4 जून 2003 को रायपुर में गोली मारकर की गई थी।

    Q3. अमित जोगी को कब बरी किया गया था?

    A: सबूतों के अभाव में रायपुर की विशेष अदालत ने 31 मई 2007 को अमित जोगी को दोषमुक्त कर दिया था, जिसे अब हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।

    Radheshyam Patel
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