गरियाबंद। नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के गंभीर मामले में गरियाबंद की विशेष पॉक्सो अदालत ने दो आरोपियों को 20-20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने मुख्य आरोपी रमजान खान (28) और उसके सहयोगी अब्दुल रहमान (23) पर अलग-अलग धाराओं के तहत कुल 36-36 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
अपर सत्र न्यायाधीश एवं फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय (पॉक्सो एवं बलात्कार मामले) की पीठासीन न्यायाधीश श्रीमती गंगा पटेल ने प्रकरण में प्रस्तुत तथ्यों, परिस्थितियों और साक्ष्यों के आधार पर यह फैसला सुनाया। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक हरि नारायण त्रिवेदी ने पैरवी की।

पिता की शिकायत पर दर्ज हुआ था मामला
अभियोजन के अनुसार, 13 सितंबर 2024 को पीड़िता के पिता ने देवभोग थाने में अपनी नाबालिग बेटी के घर से लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसी दिन शाम को पीड़िता को रमजान खान के कब्जे से उसके मित्र अब्दुल रहमान के घर से बरामद किया।
पीड़िता के कथन के आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और पॉक्सो अधिनियम की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया। विवेचना पूरी होने के बाद न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 13 साक्षियों के बयान कराए।
अलग-अलग धाराओं में सुनाई सजा
न्यायालय ने मुख्य आरोपी रमजान खान को पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत 20 वर्ष का सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड, भारतीय न्याय संहिता की धारा 87 के तहत 5 वर्ष का सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 137(2) के तहत 3 वर्ष का सश्रम कारावास और 3 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया।
वहीं, सहयोगी आरोपी अब्दुल रहमान को पॉक्सो अधिनियम की धारा 18 के तहत 20 वर्ष का सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड, भारतीय न्याय संहिता की धारा 87(3), (5) के तहत 5 वर्ष का सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 137(2), (3), (5) के तहत 3 वर्ष का सश्रम कारावास और 3 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
अदालत ने आरोपियों के कृत्य को गंभीर प्रकृति का अपराध माना। इस फैसले में नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म से जुड़े मामले में अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों की अहम भूमिका रही।



