मैनपुर जनपद में 17 दिसंबर 2025 से अब तक प्रशासनिक जिम्मेदारी में बदलाव का दौर; नागवंशी के बाद जितेश गजभिए और अब गेंदलाल चुरेंद्र को जिम्मेदारी, पंचायतों के कामकाज की निरंतरता पर सवाल
मैनपुर। ग्राम पंचायतों में विकास की गति केवल बजट और योजनाओं से नहीं, बल्कि उनकी लगातार मॉनिटरिंग और प्रशासनिक निर्णयों की निरंतरता से भी जुड़ी होती है। ऐसे में जब जनपद पंचायत स्तर पर जिम्मेदारी बार-बार बदलती रहे तो उसका असर पंचायतों में चल रहे कार्यों की गति पर पड़ने की आशंका रहती है। मैनपुर जनपद पंचायत में मुख्य कार्यपालन अधिकारी के लगातार बदलते प्रभार को लेकर अब यही सवाल उठ रहा है कि 74 ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों को स्थायी गति आखिर कैसे मिलेगी?
गरियाबंद जिला प्रशासन की आधिकारिक जानकारी के अनुसार मैनपुर विकासखंड में 74 ग्राम पंचायतें और 179 गांव हैं। इतना बड़ा ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण जनपद स्तर पर प्रशासनिक नेतृत्व की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
1978 में शुरू हुई जनपद की व्यवस्था, अब तक करीब 48 अधिकारियों की पदस्थापना
स्थानीय जानकारी के अनुसार जनपद पंचायत मैनपुर कार्यालय की स्थापना 2 अक्टूबर 1978 को हुई थी। स्थापना के समय प्रथम मुख्य कार्यपालन अधिकारी के रूप में वी.एस.ए.एस. त्यागी को जिम्मेदारी दिए जाने की जानकारी सामने आती है।
इसके बाद अब तक करीब 48 अन्य मुख्य कार्यपालन अधिकारियों की पदस्थापना हो चुकी है। यानी जनपद पंचायत के लगभग पांच दशक के सफर में प्रशासनिक नेतृत्व में लगातार बदलाव होता रहा है।
यह आंकड़ा अपने आप में इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रत्येक नए अधिकारी को क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों, पंचायतवार समस्याओं, लंबित विकास कार्यों, योजनाओं की प्रगति और प्रशासनिक व्यवस्था को समझने में समय लगता है।
17 दिसंबर से 3 अगस्त तक तीन चरणों में बदली कमान
स्थानीय जानकारी के अनुसार हाल के महीनों में भी जनपद पंचायत मैनपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी की जिम्मेदारी में बदलाव हुआ।
17 दिसंबर 2025 से 30 अप्रैल 2026 तक नागवंशी को मुख्य कार्यपालन अधिकारी की जिम्मेदारी मिली। इसके बाद जितेश गजभिए को मैनपुर जनपद पंचायत का कार्यभार सौंपा गया, जो 3 अगस्त 2026 तक जिम्मेदारी में रहे।
इसके बाद एक बार फिर प्रशासनिक फेरबदल हुआ और गेंदलाल चुरेंद्र को मैनपुर जनपद पंचायत का कार्यभार दिया गया।
यानी एक ही विकासखंड में कुछ ही महीनों के अंतराल में प्रशासनिक नेतृत्व बदलता रहा। अब सवाल यह है कि इस दौरान जिन विकास कार्यों की समीक्षा शुरू हुई थी, उनकी प्राथमिकताएं और निर्णय प्रक्रिया नए अधिकारी के आने के बाद कितनी तेजी से आगे बढ़ पाएगी।
74 पंचायतें…179 गांव और जिम्मेदारी बड़ी
मैनपुर विकासखंड — 74 ग्राम पंचायत, 179 गांव
यह आंकड़ा बताता है कि जनपद पंचायत का प्रशासनिक क्षेत्र कितना बड़ा है। जिला प्रशासन की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मैनपुर विकासखंड का क्षेत्रफल 670.52 वर्ग किलोमीटर है।
ऐसे क्षेत्र में सड़क, पुल-पुलिया, पेयजल, नाली, पंचायत भवन, आवास, मनरेगा, रोजगार और अन्य ग्रामीण विकास योजनाओं की नियमित समीक्षा के लिए मजबूत प्रशासनिक मॉनिटरिंग जरूरी होती है।
अधिकारी बदलता है तो फाइलों के साथ प्राथमिकताएं भी बदलने का खतरा
किसी भी नए अधिकारी के सामने सबसे पहले लंबित मामलों और योजनाओं की स्थिति समझने की चुनौती होती है। किस पंचायत में कौन सा काम अधूरा है, किस योजना में भुगतान लंबित है, कहां तकनीकी स्वीकृति बाकी है और किन निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांच जरूरी है—इन सभी बिंदुओं को समझने में समय लगता है।
यदि इसी बीच अधिकारी का तबादला या प्रभार बदल जाता है तो नई व्यवस्था को फिर से शुरुआत करनी पड़ सकती है।
यही वह बिंदु है जहां ग्रामीण विकास की गति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
पहले भी मैनपुर में विकास योजनाओं की मॉनिटरिंग पर कार्रवाई
मैनपुर क्षेत्र में विकास योजनाओं की निगरानी को लेकर प्रशासन पहले भी कार्रवाई कर चुका है। छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग की एक रिपोर्ट में प्रधानमंत्री आवास योजना के निरीक्षण के दौरान कुछ आवासों के अपूर्ण होने और जियोटैगिंग में गड़बड़ी सामने आने की जानकारी दी गई थी। इस मामले में संबंधित कर्मचारियों पर कार्रवाई के साथ मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत मैनपुर सहित संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।
इससे साफ है कि पंचायत स्तर की योजनाओं में केवल स्वीकृति ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमित निरीक्षण और मॉनिटरिंग भी जरूरी है।
ग्रामीणों के सामने बड़ा सवाल—काम की रफ्तार कब बढ़ेगी?
गांवों में सड़क, नाली, पेयजल, सामुदायिक भवन और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कार्यों का इंतजार सीधे ग्रामीणों को करना पड़ता है। ऐसे में प्रशासनिक बदलाव का असर यदि काम की गति पर पड़ता है तो उसका खामियाजा भी ग्रामीणों को ही भुगतना पड़ता है।
अब ग्रामीणों की नजर नए प्रभारी गेंदलाल चुरेंद्र के कार्यकाल पर है। क्या वे 74 ग्राम पंचायतों की लंबित योजनाओं की पंचायतवार समीक्षा करेंगे? क्या पुराने अधूरे कार्यों को प्राथमिकता मिलेगी? क्या अधिकारियों और पंचायत सचिवों की नियमित समीक्षा होगी? और क्या विकास कार्यों के लिए ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी जिससे अधिकारी बदलने के बावजूद योजनाओं की गति न रुके?
अब देखना यह… नई कमान से कितनी तेज होगी विकास की चाल
मैनपुर जनपद पंचायत की प्रशासनिक व्यवस्था में बार-बार हो रहे बदलाव के बीच अब सबसे बड़ा सवाल अधिकारी कौन है, यह नहीं बल्कि विकास कार्य कितनी तेजी से होते हैं, यह है।
नए प्रभारी अधिकारी के सामने 74 ग्राम पंचायतों और 179 गांवों में चल रहे विकास कार्यों को गति देने की बड़ी चुनौती है।
अब देखना यह है कि गेंदलाल चुरेंद्र के कार्यभार संभालने के बाद मैनपुर की ग्राम पंचायतों में विकास की रफ्तार तेज होती है या प्रशासनिक फेरबदल का सिलसिला एक बार फिर विकास कार्यों की गति पर भारी पड़ता है।
पड़ताल का सवाल:
क्या मैनपुर जनपद पंचायत को एक स्थायी प्रशासनिक नेतृत्व की जरूरत है, ताकि 74 ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों की मॉनिटरिंग और योजनाओं की निरंतरता बनी रहे?


