राधे पटेल / गरियाबंद भारत और नेपाल के बीच एक बार फिर लिपुलेख दर्रे (Lipulekh Pass) को लेकर विवाद तेज हो गया है। हाल ही में नेपाल ने भारत द्वारा कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए इस मार्ग के उपयोग पर आपत्ति जताई, जिसे भारत ने साफ तौर पर खारिज कर दिया।
क्या है Lipulekh Pass विवाद?
Lipulekh Pass हिमालय क्षेत्र में स्थित एक रणनीतिक दर्रा है, जो भारत, नेपाल और चीन (तिब्बत) के बीच अहम कनेक्शन बनाता है। यह मार्ग वर्षों से व्यापार और कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए उपयोग किया जाता रहा है।
लेकिन विवाद की जड़ यह है कि:
- नेपाल का दावा है कि लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा उसके क्षेत्र का हिस्सा हैं (1816 की सुगौली संधि के आधार पर)।
- वहीं भारत का कहना है कि यह इलाका उसके प्रशासन में लंबे समय से है और नेपाल का दावा ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित नहीं है।
हालिया विवाद कैसे शुरू हुआ?
2026 में भारत और चीन ने कैलाश मानसरोवर यात्रा को दोबारा शुरू करने का फैसला लिया, जिसमें एक प्रमुख मार्ग लिपुलेख पास से गुजरता है।
इस पर नेपाल ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि:
- यह क्षेत्र उसकी संप्रभुता में आता है
- बिना अनुमति इस मार्ग का उपयोग स्वीकार नहीं
इसके जवाब में भारत ने कहा कि:
- यह मार्ग 1954 से लगातार उपयोग में है
- नेपाल का दावा “असंगत और तथ्यहीन” है
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्यों महत्वपूर्ण है?
यह विवाद सिर्फ दो देशों के बीच नहीं है, बल्कि इसमें चीन का भी अप्रत्यक्ष रोल है क्योंकि यह मार्ग तिब्बत (चीन) तक जाता है।
- यह इलाका सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील है
- भारत-चीन-नेपाल के त्रिकोणीय संबंधों पर असर पड़ता है
- क्षेत्रीय राजनीति और भू-राजनीति (Geo-politics) में इसकी अहम भूमिका है
भारत और नेपाल के रिश्तों पर असर
- भारत और नेपाल के संबंध ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे हैं
- लेकिन सीमा विवाद समय-समय पर तनाव बढ़ाते रहे हैं
- 2020 में भी नक्शा विवाद और सड़क निर्माण को लेकर तनाव बढ़ा था
अब एक बार फिर यह मुद्दा दोनों देशों के बीच कूटनीतिक चुनौती बन गया है
लिपुलेख पास विवाद केवल एक सीमा विवाद नहीं, बल्कि इतिहास, भू-राजनीति और कूटनीति का जटिल मिश्रण है।
भारत ने नेपाल की आपत्ति को खारिज कर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है, लेकिन यह मामला अभी खत्म नहीं हुआ है।
आने वाले समय में बातचीत और कूटनीतिक प्रयास ही इस विवाद का समाधान तय करेंगे।




