सुशासन तिहार में कलेक्टर ने 15 दिनों में नेटवर्क चालू करने का दिया था आश्वासन, अब ग्रामीणों में नाराजगी
गरियाबंद। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधा एक बड़ी समस्या बनी हुई है। साहेबिन कछार सहित क्षेत्र के कई गांवों में लोग वर्षों से मोबाइल नेटवर्क की समस्या से जूझ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि फोन करने और इंटरनेट चलाने के लिए लोगों को कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। इसी समस्या को लेकर सुशासन तिहार के शिविर में ग्रामीणों ने कलेक्टर के सामने अपनी मांग रखी थी।
कलेक्टर बी.एस. उइके जब साहेबिन कछार सुशासन तिहार के शिविर में पहुंचे थे, तब सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया था कि महज 15 दिनों के भीतर मोबाइल टावर चालू कर दिया जाएगा। उस समय गांव वालों को उम्मीद जगी थी कि अब वर्षों पुरानी समस्या खत्म हो जाएगी। लेकिन आज पूरे दो महीने बीत जाने के बाद भी मोबाइल टावर शुरू नहीं हो सका है। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के दशकों बाद भी गांवों को बुनियादी नेटवर्क सुविधा नहीं मिल पाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। लोगों का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी जब रायपुर के कलेक्टर थे, उस समय के बाद अब पहली बार गरियाबंद के वर्तमान कलेक्टर बी.एस. उइके साहेबिन कछार पहुंचे थे। ग्रामीणों ने अपनी कई समस्याओं के बीच मोबाइल टावर शुरू करने की मांग प्रमुखता से रखी थी, जिस पर तत्काल आश्वासन भी दिया गया था। लेकिन समय बीतने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है।
मोबाइल नेटवर्क नहीं होने से सबसे ज्यादा परेशानी छात्रों और युवाओं को हो रही है। ऑनलाइन पढ़ाई, सरकारी योजनाओं की जानकारी, बैंकिंग सेवाएं और डिजिटल भुगतान जैसी सुविधाएं ग्रामीणों तक सही तरीके से नहीं पहुंच पा रही हैं। देश में डिजिटल इंडिया और ग्रामीण कनेक्टिविटी को लेकर कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। सरकार ने ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में मोबाइल कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए हजारों टावर लगाने की बात कही है।
ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव और शिविरों में बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर काम दिखाई नहीं देता। गांव वालों के अनुसार अब विकास के दावे खोखले नजर आने लगे हैं। लोगों का सवाल है कि जब प्रशासन खुद समय सीमा तय कर आश्वासन देता है, तो फिर काम पूरा क्यों नहीं होता?
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से जल्द मोबाइल टावर चालू कराने की मांग की है ताकि गांव भी संचार और डिजिटल सुविधाओं से जुड़ सके। लोगों का कहना है कि आज के दौर में मोबाइल नेटवर्क केवल सुविधा नहीं बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुरक्षा से जुड़ी एक जरूरी आवश्यकता बन चुका है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की कमी से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।



