गरियाबंद। न्याय, अधिकार और आदिवासी अस्मिता की रक्षा की मांग को लेकर विशेष पिछड़ी जनजाति कमार समुदाय समेत हजारों आदिवासी बुधवार को तीर-कमान, कुल्हाड़ी के साथ लगभग 06 किलोमीटर पैदल चलकर गरियाबंद मुख्यालय पहुंचे। गांधी मैदान में आदिवासी समाज द्वारा अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की गई, जिसमें विभिन्न सामाजिक संगठनों और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने भी समर्थन दिया।
आंदोलन में शामिल ग्रामीणों का कहना है कि भारतीय संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत लागू पेसा (PESA) अधिनियम 1996 अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को व्यापक अधिकार देता है, लेकिन उनके क्षेत्र में ग्राम सभा के प्रस्तावों और निर्णयों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
पेसा कानून का उल्लंघन होने का आरोप
आंदोलनकारियों का आरोप है कि अनुसूचित क्षेत्र होने के बावजूद स्थानीय ग्राम सभाओं की सहमति और सुझावों को विकास योजनाओं तथा प्रशासनिक निर्णयों में महत्व नहीं दिया जा रहा। ग्रामीणों का कहना है कि संविधान और पेसा कानून में ग्राम सभा को जो अधिकार दिए गए हैं, वे केवल कागजों तक सीमित होकर रह गए हैं।
वन विभाग पर लगाए गंभीर आरोप
भूख हड़ताल में शामिल लोगों ने आरोप लगाया कि वन विभाग द्वारा ग्रामीणों से पीओआर (POR) मामलों में कार्रवाई की जा रही है, जबकि क्षेत्र के बुजुर्गों का दावा है कि पहले इस प्रकार की कार्रवाई कभी नहीं की जाती थी। ग्रामीणों का कहना है कि वन अधिकारों और पारंपरिक उपयोग को लेकर लगातार विवाद की स्थिति बन रही है।
हालांकि इन आरोपों पर वन विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सड़क और विकास कार्यों में एनओसी बना बड़ा मुद्दा
आंदोलनकारियों के अनुसार क्षेत्र में सड़क, पुल, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की मांग वर्षों से की जा रही है, लेकिन अधिकांश मामलों में वन विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्रक्रिया सबसे बड़ी बाधा बन जाती है।
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क और आवागमन सुविधाओं की मांग होने पर भी वन स्वीकृति नहीं मिलने के कारण कई परियोजनाएं वर्षों से लंबित हैं। इसका सीधा असर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
तीर-कमान के साथ निकली रैली
गांधी मैदान पहुंचने से पहले आदिवासियों ने शहर में रैली निकाली। इस दौरान पुरुष, महिलाएं और युवा पारंपरिक तीर-कमान तथा सांस्कृतिक प्रतीकों के साथ दिखाई दिए। प्रदर्शनकारियों ने “जल, जंगल, जमीन हमारा है”, “पेसा कानून लागू करो”, “आदिवासी अधिकारों की रक्षा करो” और “झूठे मामलों को वापस लो” जैसे नारे लगाए।
आंदोलन स्थल पर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दिया। पार्टी पदाधिकारियों ने कहा कि आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा और सरकार को आदिवासी क्षेत्रों की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। फिलहाल जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
आदिवासी समाज का कहना है कि यह आंदोलन केवल किसी एक गांव या समुदाय का नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त अधिकारों, ग्राम सभा की स्वायत्तता और जल-जंगल-जमीन से जुड़े अस्तित्व की लड़ाई है।



पेसा कानून का उल्लंघन होने का आरोप
तीर-कमान के साथ निकली रैली