राधे पटेल / गरियाबंद शादी को जन्म-जन्मांतर का बंधन माना जाता है, लेकिन आज के दौर में शादी के बाद घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना और आपसी विवाद के मामले थानों और कोर्ट-कचहरी में आम हो गए हैं। इन गंभीर अपराधों और पारिवारिक कलह को जड़ से खत्म करने के लिए गरियाबंद जिले में एक बेहद अहम और चौंकाने वाली पहल की गई है। प्रशासन ने अब शादी के बाद नहीं, बल्कि शादी से पहले ही मामलों को सुधारने की तैयारी कर ली है।

क्या है ‘विवाह पूर्व संवाद केंद्र’ का मुख्य मकसद? महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा शुरू किए गए इस ‘विवाह पूर्व संवाद केंद्र’ (Pre-Marital Counseling Center) का सीधा उद्देश्य युवाओं और भावी दंपत्तियों को वैवाहिक जीवन की असलियतों के लिए तैयार करना है। अक्सर जानकारी के अभाव में छोटे विवाद बड़े अपराधों का रूप ले लेते हैं। इस केंद्र में आपसी समझ, स्वास्थ्य जागरूकता और सबसे अहम—कानूनी अधिकारों और दायित्वों की विस्तार से जानकारी दी जाएगी।
दहेज निषेध और घरेलू हिंसा पर मिलेगी सख्त गाइडेंस जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) श्री अशोक पाण्डेय ने इस योजना की बारीकियों का खुलासा करते हुए बताया कि इस केंद्र के माध्यम से विशेष परामर्श सत्र चलाए जाएंगे। इन सत्रों में युवाओं को दहेज निषेध कानून, घरेलू हिंसा से बचाव और लैंगिक समानता जैसे बेहद संवेदनशील और गंभीर विषयों पर मार्गदर्शन दिया जाएगा। सिर्फ इतना ही नहीं, स्वास्थ्य विभाग की टीम भी इस मोर्चे पर साथ होगी, जो युवाओं को प्रजनन और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करेगी ताकि वे एक संतुलित जीवन जी सकें।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिला खास टास्क इस महा-अभियान को हर घर तक पहुंचाने के लिए जिले के सभी परियोजना अधिकारियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सख्त निर्देश दिए गए हैं। उन्हें टास्क दिया गया है कि वे अधिक से अधिक युवाओं और परिवारों को इस केंद्र तक लाएं। विभाग ने जनता से भी सीधे अपील की है कि वे शादी से पहले इस संवाद और काउंसलिंग सुविधा का फायदा उठाएं, ताकि भविष्य में किसी भी तरह के मानसिक या शारीरिक उत्पीड़न से बचा जा सके और एक मजबूत परिवार की नींव रखी जाए।


