गरियाबंद। जिले के गोना समाधान शिविर (सुशासन तिहार ) में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली, जहां मंच पर लगी कुर्सियां खाली रह गईं और जिला कलेक्टर, एसपी, जनप्रतिनिधि एवं
अधिकारी ग्रामीणों के साथ जमीन पर बैठकर उनकी समस्याएं सुनते नजर आए। पहली बार ऐसा देखने को मिला कि गरियाबंद कलेक्टर भगवान सिंह उईके एवं पुलिस अधीक्षक वेदव्रत सिरमौर सहित जिला प्रशासन के अधिकारी , जिला पंचायत अध्यक्ष गौरी शंकर कश्यप , जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम , उदंती की शेरनी कहे जाने वाली जिला पंचायत सदस्य श्रीमति लोकेश्वरी नेताम , SDM हितेश्वरी बाघे, सुशील कुमार भोई तहसीलदार समेत सैकड़ो ग्रामीणों के बीच जमीन में बैठकर त्वरित समस्याओं का अवलोकन करते हुए समाधान की कार्रवाई करते दिखाई दिए।
8 ग्राम पंचायतों के हजारों ग्रामीण “हम अपना अधिकार मांगते हैं, नहीं किसी से भीख मांगते” के नारों के साथ रैली के रूप में समाधान शिविर में पहुंचे। ग्रामीण अपनी प्रमुख 17 मांगों को लेकर एक सुर में प्रशासन के सामने पहुंचे और वर्षों से चली आ रही समस्याओं को अधिकारियों के सामने रखकर अपने साथ बैठ कर समाधान करने को कहा ग्रामीणों ने ।
ग्रामीणों ने बिजली विहीन गांवों में बिजली व्यवस्था करने की मांग उठाई। वहीं शोभा क्षेत्र के अस्पताल में स्टाफ की कमी को लेकर भी ग्रामीणों ने CHMO से नाराजगी जताई और स्थायी स्वास्थ्य व्यवस्था की मांग की। अधूरी पड़ी नल-जल योजना को दुरुस्त कर ग्रामीणों तक नियमित पानी पहुंचाने की मांग भी प्रमुख रूप से रखी गई। वही अधूरे परे नल-जल की टंकी को पूर्ण करवाकर पानी पहुचाये अन्यथा टेंडर को कैंसिल करने की बात कही कलेक्टर ने।

स्कूल जतन योजना के अंतर्गत अनेकों अधूरे पड़े स्कूल भवनों को 30 जून तक पूर्ण कराने की मांग को लेकर भी ग्रामीणों ने प्रशासन को घेरा। ग्रामीणों ने कहा कि कई स्कूल भवन वर्षों से अधूरे पड़े हैं, किसी की सिर्फ नीव खोद कर छोर दिया है तो कही पर छत की ढलाई कार्य सालो से अधूरे है , जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसके साथ ही जर्जर सड़कों की मरम्मत कराने की गुहार लगाई गई। ग्रामीणों ने बताया कि खराब सड़कों के कारण आवागमन में भारी परेशानी होती है , साथ ही उदंती अभयारण्य / टाइगर रिज़र्व होने के कारण नए सड़को की स्वीकृति में बाधा आने की बात को लेकर ग्रामीणों ने कलेक्टर से गुहार लगाई की जो कार्य जिला अधिकारी के अधिकार क्षेत्र से बाहर है तो हमे मुख्यमंत्री जी से मुलाकात करने में मदद करें ।
वन अधिकार प्राप्त पट्टे वाले लोगों को राजस्व रिकॉर्ड में शामिल करने की मांग भी जोर-शोर से उठाई गई। ग्रामीणों ने कहा कि वन अधिकार पट्टा मिलने के बाद भी कई लोगों का नाम राजस्व रिकॉर्ड में शामिल नहीं किया गया है, जिससे उन्हें योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीणों ने पेट्रोल और डीजल एवं खाद की कमी की समस्या को लेकर भी प्रशासन को अवगत कराया। किसानों ने खेती-किसानी में आने वाली परेशानियों से अधिकारियों को रूबरू करवाया और कहा कि समय पर सुविधाएं नहीं मिलने के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान / फसल उत्पादन की मात्रा में भारी छति हो रही है।
सुशासन तिहार शिविर में ग्रामीणों और अधिकारियों के बीच सीधा संवाद देखने को मिला। कई समस्याओं का मौके पर ही निराकरण किया गया, जबकि अन्य मांगों पर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। ग्रामीणों ने कहा कि पहली बार ऐसा महसूस हुआ कि प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुन रहा है।
शिविर में जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, जनप्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि उनकी 17 प्रमुख मांगों पर जल्द अमल होगा और क्षेत्र की वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान निकलेगा।
अब देखना यह है की क्या पिछले बार की तरह की इस बार भी जनता को आश्वासन की झूठी उम्मीद देकर सरकार भोले भाले जानता को गुमराह करेगी या समस्या का समाधान करके जनता के दिलो में राज करेगी।
देश के भविष्य को नया गति देने के लिए क्या सच में अधूरे पड़े स्कूल जतन योजना के अधूरे भवनों को ३० जून तक पूर्ण कर पायेगी सरकार ?
ढाई सालो से अधूरे राजस्व प्रकरण को क्या आने वाले ३ महीनो में पूर्ण कर पायेगी सरकारी व्यवस्था ?



