राधे पटेल / गरियाबंद छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के देहारगुड़ा स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला में मॉक टेस्ट तैयारी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान भी यहां पढ़ाई जारी रखते हुए विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार किया जा रहा है।
ग्रीष्म अवकाश में भी जारी विशेष कक्षाएं

जहां अधिकांश स्कूलों में अवकाश के दौरान शैक्षणिक गतिविधियां बंद रहती हैं, वहीं देहारगुड़ा संकुल केंद्र गिरहोला, विकासखंड मैनपुर में प्रधान पाठक चित्रसेन पटेल के नेतृत्व में पढ़ाई लगातार जारी है।
विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए प्रतिदिन एक घंटे की अतिरिक्त कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। इन कक्षाओं में विशेष रूप से प्रयास आवासीय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराई जा रही है।
मॉक टेस्ट से मिल रहा वास्तविक परीक्षा अनुभव
मॉक टेस्ट तैयारी को मजबूत बनाने के लिए विद्यार्थियों के लिए नियमित रूप से टेस्ट आयोजित किए जा रहे हैं।
- विषयवार अभ्यास कराया जा रहा है
- परीक्षा पैटर्न के अनुसार प्रश्न हल करवाए जा रहे हैं
- समय प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है
विशेषज्ञों के अनुसार, मॉक टेस्ट से छात्रों को वास्तविक परीक्षा जैसा अनुभव मिलता है, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और प्रदर्शन बेहतर होता है।
कमजोरियों की पहचान और सुधार का अवसर
नियमित मॉक टेस्ट के माध्यम से छात्रों की कमजोरियों की पहचान की जा रही है।
- प्रत्येक टेस्ट के बाद विश्लेषण
- गलतियों पर सुधार
- व्यक्तिगत मार्गदर्शन
इस प्रक्रिया से विद्यार्थियों की तैयारी अधिक सुदृढ़ और प्रभावी बन रही है।
छात्रों में बढ़ा उत्साह और आत्मविश्वास
प्रधान पाठक चित्रसेन पटेल के इस प्रयास का सकारात्मक असर साफ दिखाई दे रहा है।
- छात्रों में प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रति रुचि बढ़ी
- आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि
- अभिभावकों में भी संतोष का माहौल
शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह की पहल से ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को बेहतर अवसर मिल रहे हैं।
प्रेरणादायक पहल बनी मिसाल
देहारगुड़ा विद्यालय की यह पहल अन्य शिक्षकों और स्कूलों के लिए प्रेरणा बन रही है।
देशभर में भी आवासीय विद्यालय और विशेष कोचिंग योजनाएं छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, जिससे शिक्षा का स्तर लगातार बेहतर हो रहा है।
मॉक टेस्ट तैयारी के माध्यम से देहारगुड़ा विद्यालय ने यह साबित कर दिया है कि समर्पण और निरंतर प्रयास से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। ग्रीष्म अवकाश में भी जारी यह शैक्षणिक पहल छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव तैयार कर रही है।


