वन्यजीव संरक्षण सप्ताह में ओड़ और बम्हनीझोला के स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम; बच्चों को पक्षियों के प्राकृतिक आवास और घोंसलों की सुरक्षा का बताया महत्व
वन्यजीव संरक्षण सप्ताह के तहत उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में पक्षियों और जैव-विविधता के संरक्षण को लेकर जागरूकता अभियान चलाया गया। 6 अक्टूबर को कुल्हाड़ीघाट परिक्षेत्र के हॉर्नबिल ग्राम ओड़ तथा दक्षिण उदंती परिक्षेत्र के उड़न गिलहरी ग्राम बम्हनीझोला स्थित प्राथमिक एवं मिडिल स्कूलों में पक्षी संरक्षण एवं पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य फोकस गौरैया सहित विभिन्न पक्षियों के संरक्षण और बच्चों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाने पर रहा। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व जैव-विविधता से समृद्ध क्षेत्र है, जहां विभिन्न वन्यजीवों के साथ पक्षियों की भी विविध प्रजातियां पाई जाती हैं।
गौरैया के लिए घोंसला, दाना-पानी और सुरक्षित आवास का संदेश
कार्यक्रम में गौरैया पक्षी संरक्षण कार्यकर्ता मोहन साहू एवं उनकी टीम ने विद्यार्थियों को गौरैया सहित अन्य पक्षियों के पारिस्थितिक महत्व की जानकारी दी। बच्चों को बताया गया कि पक्षियों के संरक्षण के लिए उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखना, घोंसलों को नुकसान से बचाना तथा गर्मी और अन्य मौसमों में उनके लिए दाना-पानी की व्यवस्था करना महत्वपूर्ण है।
विद्यार्थियों को पक्षियों के जीवनचक्र, उनके रहने के स्थान और पर्यावरण में उनकी भूमिका के बारे में भी जानकारी दी गई। बच्चों से प्रकृति और जैव-विविधता के संरक्षण में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया गया।
मिट्टी और लकड़ी के घोंसले बांटे
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को मिट्टी एवं लकड़ी से निर्मित पक्षी घोंसले वितरित किए गए। इन घोंसलों के माध्यम से बच्चों को अपने आसपास पक्षियों के लिए सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने का संदेश दिया गया।
इसके साथ ही विद्यार्थियों के उत्साहवर्धन और आवश्यक सहयोग के उद्देश्य से टी-शर्ट, स्वेटर एवं खेल सामग्री का भी वितरण किया गया।
वन विभाग के अधिकारी और ग्रामीण रहे मौजूद
कार्यक्रम में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वरुण जैन, सहायक संचालक जे.पी. दर्रो, गोपाल कश्यप, बालगोविंद साहू, बी.एस. राजपूत, वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. राकेश वर्मा, वन परिक्षेत्राधिकारी दिनेश चौधरी, के.आर. कोरचे, सुशील सागर, चंद्रबली ध्रुव, ज्योति ध्रुव और कविता ठाकुर सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
संबंधित गांवों के सरपंच, शिक्षकगण और बड़ी संख्या में ग्रामीण भी कार्यक्रम में शामिल हुए। स्थानीय समुदाय की भागीदारी को वन्यजीव संरक्षण के संदेश को गांव-गांव तक पहुंचाने की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा गया।
बच्चों से शुरू हुई संरक्षण की पहल
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पक्षियों की जानकारी देना नहीं, बल्कि बच्चों को स्थानीय जैव-विविधता के संरक्षण से सीधे जोड़ना रहा। आयोजकों ने विद्यार्थियों को समझाया कि छोटे-छोटे प्रयासों से भी पक्षियों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार किया जा सकता है।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में संरक्षण गतिविधियों में स्थानीय समुदाय की भागीदारी पर भी जोर दिया जाता रहा है। रिजर्व की आधिकारिक जानकारी के अनुसार इसका संरक्षण मिशन समुदायों और सरकारों के साथ मिलकर प्राकृतिक विरासत के संरक्षण पर केंद्रित है।
वन्यजीव संरक्षण सप्ताह के दौरान आयोजित इस कार्यक्रम ने बच्चों के बीच ‘पक्षी बचेंगे तो प्रकृति बचेगी’ का संदेश पहुंचाया। आयोजकों के अनुसार ऐसे कार्यक्रमों से स्थानीय समुदाय और नई पीढ़ी को वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी से जोड़ने में मदद मिलती है।



