राधे पटेल / गरियाबंद गरियाबंद।जिले के मैनपुर ब्लॉक अंतर्गत महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका के रिक्त पदों पर निकाली गई भर्ती अब विवादों के घेरे में आ गई है। प्रशासन द्वारा उरमाल, अमलीपदर, झरगांव और गोहरापदर सेक्टर के लिए कुल 06 रिक्त पदों पर विज्ञापन जारी कर विधिवत आवेदन मंगाए गए थे। इन 6 पदों में से 1 पद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का था, जिसके लिए शैक्षणिक योग्यता 12वीं पास तय की गई थी, जबकि अन्य 5 पद आंगनबाड़ी सहायिका के थे, जिनके लिए न्यूनतम योग्यता 8वीं पास निर्धारित थी।

धरनीधोड़ा का मामला: योग्यता बनाम फर्जीवाड़ा भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद ग्राम धारणीधोणा में आंगनबाड़ी सहायिका के पद पर चयन को लेकर भारी धांधली की बात सामने आ रही है। इस पूरी चयन प्रक्रिया में मुख्य रूप से दो अभ्यर्थियों— ललिता नेताम और माधुरी दुर्गा का मामला सबसे ज्यादा तूल पकड़ रहा है।
परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि चयन समिति ने एक योग्य अभ्यर्थी को जानबूझकर प्रक्रिया से बाहर कर दिया। संबंधित अभ्यर्थी ने सत्र 2019-20 में 8वीं की बोर्ड परीक्षा में 96.96% अंक हासिल किए थे, जो सहायिका पद (योग्यता 8वीं पास) के लिए उसे सबसे प्रबल दावेदार बनाता था। लेकिन प्रशासन और चयन समिति ने यह कहकर उसकी उम्मीदवारी निरस्त कर दी कि यह ‘कोरोना काल’ का परीक्षा परिणाम है, जिसे मान्य नहीं किया जा सकता।

अपात्र को मिले BPL के 6 अंक धांधली का आरोप केवल योग्य को बाहर करने तक ही सीमित नहीं है। बताया जा रहा है कि दूसरी अभ्यर्थी को गरीबी रेखा (BPL) श्रेणी में पात्रता न होने के बावजूद, फर्जी तरीके से इस श्रेणी के 6 अतिरिक्त अंक दे दिए गए। इन्ही अंकों की बदौलत उस अपात्र अभ्यर्थी को आंगनबाड़ी सहायिका के पद पर नियुक्त कर दिया गया।
25 दिन से जांच फाइल धूल फांक रही, लेन-देन की आशंका इस मनमानी और फर्जीवाड़े के खिलाफ बाकायदा दावा-आपत्ति प्रस्तुत की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिले के कलेक्टर, महिला एवं बाल विकास अधिकारी और जनपद सीईओ को लिखित शिकायत दी गई।
लेकिन हैरानी की बात है कि शिकायत दिए 25 दिन बीत जाने के बाद भी इस मामले की कोई जांच शुरू नहीं हुई है। अधिकारियों की इस रहस्यमयी चुप्पी से इस पूरी भर्ती प्रक्रिया में किसी बड़े आर्थिक लेन-देन की आशंका गहरी होती जा रही है।

ग्रामीणों में आक्रोश, निष्पक्ष जांच की मांग भर्ती में हुए इस खुले पक्षपात को लेकर ग्राम धारणीधोणा निवासी लोचन दुर्गा और खजूरपदर निवासी चैतन सिंह नेताम ने कड़ी आपत्ति जताते हुए पूरे मामले को उजागर किया है। उनका कहना है कि गरीबों और योग्य युवाओं का हक मारकर अपात्रों को नौकरी देना सीधा-सीधा भ्रष्टाचार है। अगर जल्द ही इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
साधी चुप्पी इस पूरी चयन प्रक्रिया को लेकर विधिवत दावा-आपत्ति भी प्रस्तुत की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिले के कलेक्टर, महिला एवं बाल विकास अधिकारी और जनपद सीईओ को लिखित आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई गई थी।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि शिकायत दर्ज कराए 25 दिन बीत जाने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इस मामले में किसी भी प्रकार की जांच शुरू नहीं की गई है। प्रशासन की इस चुप्पी के कारण अब इस पूरी भर्ती प्रक्रिया में किसी बड़े आर्थिक लेन-देन का मामला संदिग्ध नजर आ रहा है।
इन्होंने लगाए हैं गंभीर आरोप ग्राम धारणीधोणा निवासी लोचन दुर्गा और खजूरपदर निवासी चैतन सिंह नेताम ने भर्ती प्रक्रिया पर कड़ा एतराज जताते हुए इस धांधली को उजागर किया है। उनका आरोप है कि अधिकारियों और चयन समिति की मिलीभगत से यह गड़बड़ी की गई है। उनका कहना है कि यदि योग्य उम्मीदवारों के साथ इसी तरह अन्याय होता रहा, तो पारदर्शी प्रशासन के दावों पर से आम जनता का विश्वास उठ जाएगा। अब देखना यह है कि प्रशासन कब इस कथित फर्जीवाड़े की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करता है।


