गरहाडीह के शासकीय हाईस्कूल में बुनियादी सुविधाओं की बदहाली का आरोप; टंकी बनी, लेकिन शौचालय तक पाइपलाइन नहीं पहुंची, बिजली के अभाव में स्मार्ट क्लास और डिजिटल उपकरण बने शोपीस
मैनपुर। गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड के ग्राम गरहाडीह स्थित शासकीय हाईस्कूल में लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए स्कूल भवन में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मामला सामने आया है। ग्रामीणों और स्कूल से जुड़े लोगों के अनुसार, करीब 64 लाख रुपये की लागत से बने इस भवन का लोकार्पण वर्ष 2022 में हुआ था, लेकिन चार साल बाद भी यहां शौचालय, बिजली और पेयजल जैसी जरूरी सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है।
स्कूल में वर्तमान में करीब 123 बच्चे अध्ययनरत बताए जा रहे हैं। इनमें कक्षा 9वीं और 10वीं के 65 तथा कक्षा 6वीं से 8वीं तक के 58 विद्यार्थी शामिल हैं। आरोप है कि शौचालय की समुचित सुविधा नहीं होने के कारण बच्चों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है।
टंकी बनी, लेकिन शौचालय तक पाइपलाइन नहीं
स्कूल भवन में शौचालय के लिए टंकी का निर्माण तो किया गया, लेकिन आरोप है कि टंकी से शौचालय तक पानी पहुंचाने वाली पाइपलाइन ही नहीं जोड़ी गई। यानी निर्माण के दौरान जरूरी काम अधूरा रह गया और इसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।
स्कूल परिसर में बनाई गई कुछ टंकियों की स्थिति भी अब खराब बताई जा रही है। स्थानीय स्तर पर उनका रखरखाव नहीं होने के कारण टंकियां क्षतिग्रस्त हो गई हैं।
मरम्मत के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति का आरोप
स्कूल भवन के रखरखाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया गया कि मरम्मत के नाम पर मुख्य रूप से फर्श की मरम्मत की गई, लेकिन भवन के अन्य हिस्सों की हालत लगातार खराब होती गई।
कई स्थानों पर प्लास्टर उखड़ने और दीवारों में सीलन की शिकायत है। वहीं, सीढ़ियों के आसपास दरारें आने की बात भी सामने आई है। ऐसे में स्कूल भवन की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।
छत पर पानी की टंकी, लेकिन पीने के पानी की समस्या
स्कूल की छत पर पानी की टंकी मौजूद है, लेकिन विद्यार्थियों के लिए नियमित और सुरक्षित पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं होने की शिकायत है। बच्चों को पीने के पानी के लिए दूसरे स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है।
स्कूलों में पेयजल और स्वच्छता सुविधाएं विद्यार्थियों के लिए बुनियादी आवश्यकताओं में शामिल हैं। केंद्र सरकार के उपलब्ध आंकड़ों में भी छत्तीसगढ़ के अधिकांश सरकारी स्कूलों में शौचालय की सुविधा दर्ज है, लेकिन किसी विद्यालय में सुविधा उपलब्ध होने और उसके वास्तव में चालू रहने में अंतर हो सकता है।
बिना बिजली के स्मार्ट क्लास और कंप्यूटर लैब
सबसे गंभीर सवाल स्कूल की स्मार्ट क्लास को लेकर उठ रहा है। स्कूल में स्मार्ट टीवी, प्रोजेक्टर, कंप्यूटर क्लास और दो विज्ञान प्रयोगशालाओं जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, लेकिन स्थानीय जानकारी के मुताबिक पिछले करीब चार वर्षों से स्कूल में बिजली कनेक्शन/आपूर्ति की समस्या बनी हुई है।
ऐसे में डिजिटल शिक्षा के लिए लगाए गए उपकरणों का नियमित इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। लाखों रुपये के उपकरण मौजूद होने के बावजूद यदि बिजली उपलब्ध नहीं है तो विद्यार्थियों को उनका शैक्षणिक लाभ नहीं मिल पा रहा है।
123 बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य से जुड़ा सवाल
स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के लिए शौचालय, स्वच्छ पेयजल और बिजली जैसी सुविधाएं महज अतिरिक्त सुविधाएं नहीं हैं। ये स्कूल के सुरक्षित और स्वस्थ शैक्षणिक वातावरण का हिस्सा हैं। खासकर बालिकाओं के लिए स्कूल में कार्यशील शौचालय का होना बेहद महत्वपूर्ण है।
गरहाडीह स्कूल के मामले में सवाल यह है कि चार साल पहले तैयार हुए भवन में जरूरी सुविधाएं अब तक पूरी तरह क्यों नहीं हो सकीं? यदि निर्माण के दौरान टंकी और शौचालय बनाए गए थे, तो उन्हें उपयोग के योग्य बनाने के लिए पाइपलाइन और पानी की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
अधिकारी बोले- निरीक्षण के बाद होगी रिपेयरिंग
मामले को लेकर जब लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर संजय यादव से जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि निरीक्षण कर स्थिति देखी जाएगी और इसके बाद रिपेयरिंग का कार्य कराया जाएगा।
अब देखना होगा कि विभाग का निरीक्षण कब होता है और स्कूल की समस्याओं का स्थायी समाधान कब तक किया जाता है। चार साल से बुनियादी सुविधाओं के इंतजार में बैठे विद्यार्थियों और शिक्षकों को अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि शौचालय, पेयजल और बिजली जैसी जरूरी सुविधाओं के वास्तविक समाधान का इंतजार है।



