गरियाबंद जिले से ओडिशा सीमा को जोड़ने वाली प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) की सड़क इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। इस सड़क की दुर्दशा का सबसे बड़ा कारण निर्माण में कमी नहीं, बल्कि बेलगाम ‘ओवरलोडिंग’ है। माल लेकर ट्रक गुजर रहे है …..
क्षमता से ढाई गुना ज्यादा वजन झेलने की कारण सड़क का डामर उखड़ रहे है…!!
ग्रामीण सड़को का निर्माण केवल 12 टन की भार क्षमता को ध्यान में रखकर किया गया था, ताकि ग्रामीणों को हर मौसम में आवागमन की सुविधा मिल सके। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि नियमों को ताक पर रखकर इस मार्ग से प्रतिदिन 28 से 30 टन तक का भारी-भरकम माल लेकर ट्रक गुजर रहे हैं। अपनी क्षमता से ढाई गुना ज्यादा वजन झेलने के कारण सड़क की सांसें उखड़ने लगी हैं और डामर टूट-टूट कर बिखर रहा है।
बैरियर के पास सबसे ज्यादा तबाही
छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर व्यापार और कृषि उपज के परिवहन के कारण मालवाहक वाहनों की भारी आवाजाही रहती है। सीमा पर स्थित बैरियर के आसपास जब 30-30 टन वजनी ये ट्रक रुकते हैं और ब्रेक लगाते हैं, तो सड़क बुरी तरह उखड़ जाती है। भारी यातायात के इसी दबाव ने सड़क को समय से पहले ही जर्जर कर दिया है, जिससे अब यहां दोपहिया वाहन चालकों के लिए हर वक्त दुर्घटना का खतरा मंडराता रहता है।
मरम्मत के नाम पर सरकारी पैसे की बर्बादी
ऐसा नहीं है कि सड़क की सुध नहीं ली गई। प्रशासन ने पहले भी इसकी मरम्मत कराई है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि 12 टन सहने वाली सैकड़ो पर जब 30 टन के ट्रक दौड़ेंगे, तो वह कितने दिन टिकेगी? ओवरलोड वाहनों की आवाजाही लगातार जारी रहने से मरम्मत के कुछ ही महीनों बाद सड़क फिर से गड्ढों में तब्दील हो जाती है और सरकारी खजाने का पैसा बर्बाद हो जाता है।
क्षमता के अनुसार तय हो यातायात: ग्रामीण
लगातार हो रही परेशानी से त्रस्त ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने स्पष्ट मांग रखी है। उनका कहना है कि जब तक इस सड़को पर चलने वाले ट्रकों की भार क्षमता 12 टन तक सीमित नहीं की जाएगी और 28-30 टन वाले ओवरलोड ट्रकों की नियमित जांच कर उन पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। यदि समय रहते इन ओवरलोड वाहनों पर लगाम नहीं कसी गई, तो यह अहम मार्ग पूरी तरह खत्म हो जाएगा और सीमा क्षेत्र का व्यापार बुरी तरह प्रभावित होगा।





