गरियाबंद। जिले के कोढ़ोहरदी जंगल क्षेत्र में नए बिजली मीटर फेंके जाने का मामला अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। एक तरफ बिजली विभाग लगातार मीटरों की कमी का हवाला देकर उपभोक्ताओं को परेशान करता है, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में नए मीटर जंगलों में पड़े मिलना विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार जंगल क्षेत्र में कई नए और पैक बिजली मीटर लावारिस हालत में पड़े मिले। कुछ मीटर पूरी तरह सुरक्षित स्थिति में दिखाई दिए, जिससे यह आशंका और गहरी हो गई कि इन्हें उपयोग से पहले ही यहां फेंक दिया गया। घटना सामने आने के बाद क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में आज भी लोग नए बिजली कनेक्शन और मीटर के लिए महीनों तक विभाग के चक्कर काटते हैं। कई बार “मीटर उपलब्ध नहीं है” कहकर आवेदन लंबित रख दिए जाते हैं। ऐसे में सरकारी मीटरों का जंगल में पड़े मिलना सीधे तौर पर विभागीय लापरवाही को उजागर करता है।
मामले को लेकर जब बिजली विभाग के अधिकारी एई जीपी बारले से चर्चा की गई, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि स्मार्ट मीटर ठेकेदारों को प्रदान किए जाते हैं। एई जीपी बारले ने कहा, “मुझे इस मामले की जानकारी नहीं है। स्मार्ट मीटर ठेकेदारों को दिए जाते हैं। मैं इस पूरे मामले की जांच करवाता हूं।”
अधिकारी के इस बयान के बाद अब सवाल और भी गंभीर हो गया है कि आखिर सरकारी मीटर जंगल तक पहुंचे कैसे? यदि मीटर ठेकेदारों को दिए गए थे, तो उनकी निगरानी और जवाबदेही किसकी थी? क्या विभाग अपने मीटरों की सुरक्षा और रखरखाव सुनिश्चित नहीं कर पा रहा है? या फिर यह मामला किसी बड़े गड़बड़झाले की ओर इशारा कर रहा है?
यह घटना सिर्फ कुछ मीटरों तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और जनता के पैसों के उपयोग से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और जांच में आखिर कौन जिम्मेदार निकलता है।



