आदिवासी बहुल क्षेत्र में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल; बीएमओ बोले—सुपरवाइजर को कई बार मना किया, फिर भी घर पर इलाज जारी होने की शिकायत
मैनपुर। आदिवासी बहुल मैनपुर क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। क्षेत्र में मौसमी बीमारियों से लेकर दुर्घटनाओं में घायल ग्रामीणों के उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और ग्रामीण इलाकों में उपस्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं। लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पर्याप्त डॉक्टर और स्टाफ नहीं होने की शिकायतों के बीच ग्रामीण क्षेत्रों में निजी तौर पर इलाज करने वालों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
इसी बीच मैनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुपरवाइजर पद पर पदस्थ ईशु पटेल पर अपने घर में क्लिनिक की तरह मरीजों का इलाज करने, मेडिकल स्टोर से दवाइयां लाकर देने और मरीजों को इंजेक्शन लगाने के आरोप लगे हैं। बताया जा रहा है कि ईशु पटेल पिछले 15 से 20 वर्षों से मैनपुर क्षेत्र में पदस्थ हैं। हालांकि, उनके घर पर इलाज करने की प्रकृति, उनकी चिकित्सकीय योग्यता और आवश्यक पंजीकरण की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
सुपरवाइजर का काम निगरानी, फिर घर पर इलाज क्यों?
स्वास्थ्य विभाग में सुपरवाइजर का प्रमुख दायित्व स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी, मैदानी कर्मचारियों के कार्यों की समीक्षा और सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में सहयोग करना होता है। केवल सुपरवाइजर पद पर पदस्थ होने से किसी व्यक्ति को डॉक्टर की तरह स्वतंत्र रूप से मरीजों का इलाज करने का अधिकार नहीं मिल जाता। इलाज करने का अधिकार उसकी मान्य चिकित्सा योग्यता और संबंधित पंजीकरण पर निर्भर करता है।
ऐसे में सवाल उठता है कि यदि ईशु पटेल अपने घर पर नियमित रूप से मरीजों का इलाज कर रहे हैं और इंजेक्शन लगा रहे हैं, तो क्या उनके पास इसके लिए आवश्यक चिकित्सकीय योग्यता और अनुमति है? क्या स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले की जांच की है? यदि विभाग को इसकी जानकारी पहले से थी, तो अब तक क्या कार्रवाई की गई?
बीएमओ ने मानी जानकारी होने की बात
इस मामले में मैनपुर के खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. गजेंद्र ध्रुव से शिकायत किए जाने पर उन्होंने बताया कि ईशु पटेल के घर पर इलाज करने की जानकारी उन्हें है। बीएमओ के अनुसार, उन्होंने कई बार उन्हें घर पर मरीजों का इलाज करने से मना किया है, लेकिन इसके बावजूद घर पर इलाज किए जाने की बात सामने आ रही है।
बीएमओ के इस कथन से मामले में विभागीय निगरानी और कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े होते हैं। यदि किसी कर्मचारी को बार-बार मना करने के बावजूद कथित रूप से घर पर इलाज जारी रखने की शिकायत है, तो विभाग ने अब तक इसकी औपचारिक जांच कराई है या नहीं, यह स्पष्ट होना जरूरी है।
आदिवासी ग्रामीणों की सेहत से जुड़ा मामला
मैनपुर ब्लॉक के दूरस्थ और आदिवासी बहुल गांवों में समय पर उपचार मिलना बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे क्षेत्रों में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों की उपलब्धता ग्रामीणों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकती है। स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के कारण यदि ग्रामीण बिना पर्याप्त जानकारी के किसी व्यक्ति से इलाज कराते हैं, तो गलत दवा या अनुचित तरीके से इंजेक्शन लगाए जाने की स्थिति में उनकी सेहत को नुकसान पहुंचने का जोखिम हो सकता है।
हालांकि, इस मामले में किसी मरीज को नुकसान पहुंचने या गलत उपचार दिए जाने का कोई पुष्ट विवरण सामने नहीं आया है। इसलिए यह जरूरी है कि विभाग आरोपों की जांच करे, संबंधित व्यक्ति की योग्यता और पंजीकरण की जानकारी की पुष्टि करे तथा आवश्यकता के अनुसार नियमानुसार कार्रवाई करे।
15-20 साल से क्षेत्र में पदस्थ, विभाग की निगरानी पर सवाल
स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि ईशु पटेल लंबे समय से मैनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ हैं और उनके घर पर मरीजों के इलाज की जानकारी विभाग को थी, तो इस गतिविधि की औपचारिक जांच पहले क्यों नहीं हुई? क्या विभाग ने उनके कार्यक्षेत्र, जिम्मेदारियों और घर पर मरीजों को दी जा रही सेवाओं की जांच की है?
इन सवालों का जवाब विभागीय जांच और आधिकारिक दस्तावेजों से ही सामने आ सकेगा। मामले में संबंधित कर्मचारी का पक्ष, उनकी चिकित्सकीय योग्यता और विभाग द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी भी सामने आना बाकी है।
अब कार्रवाई पर टिकी निगाहें
मैनपुर में सामने आया यह मामला केवल एक कर्मचारी के कथित निजी उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और जवाबदेही से भी जुड़ा है। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले में औपचारिक जांच कराता है या नहीं और जांच में नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर क्या कदम उठाए जाते हैं।
मुख्य सवाल यही है—जब बीएमओ को घर पर इलाज किए जाने की जानकारी थी और उनके अनुसार कई बार मना भी किया गया, तो अब तक इस मामले में क्या कार्रवाई हुई? ग्रामीणों को सुरक्षित और योग्य चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना विभाग की जिम्मेदारी है।


