गरियाबंद: जिले के मुड़ागांव में सड़क निर्माण की मांग को लेकर करलाकोट के सैकड़ों ग्रामीणों ने नेशनल हाईवे 130C (NH-130C) पर उग्र चक्काजाम कर दिया। इस प्रदर्शन का नेतृत्व भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के जिलाध्यक्ष हेमंत नागेश कर रहे थे। करीब एक घंटे तक चले इस हंगामे और चक्काजाम के कारण हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। बाद में पुलिस और प्रशासन की समझाइश और आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने जाम खोला।
क्या है ग्रामीणों की मुख्य समस्या?
ग्रामीणों का मुख्य आक्रोश करलाकोट ग्राम में सीसी (CC) सड़क के निर्माण को लेकर है। गांव वालों का कहना है कि बुनियादी सुविधाओं के अभाव में उनका जीवन मुश्किल हो गया है:
कीचड़ और गड्ढे: बरसात के दिनों में गांव को जोड़ने वाली इकलौती सड़क पूरी तरह से कीचड़ और बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो जाती है।
मेडिकल इमरजेंसी में परेशानी: सड़क की बदहाली के कारण आपातकाल में एंबुलेंस या अन्य वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते, जिससे मरीजों की जान पर बन आती है।
स्कूली बच्चों को दिक्कत: कीचड़ भरी सड़क के कारण स्कूली बच्चों का घर से निकलना और पढ़ाई के लिए स्कूल जाना दूभर हो जाता है।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई तीखी नोकझोंक
सड़क जाम कर बैठे आक्रोशित महिला और पुरुष ग्रामीणों को हटाने के दौरान पुलिस प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच कई बार तीखी नोकझोंक और झड़प की स्थिति निर्मित हुई। हालांकि, एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद प्रशासन ने ग्रामीणों की मांग को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने और जल्द से जल्द सीसी सड़क का निर्माण कराने का पक्का भरोसा दिलाया, जिसके बाद चक्काजाम समाप्त किया गया।
धरने में कांग्रेस की एंट्री और सरकार पर तीखा तंज
इस पूरे घटनाक्रम ने तब एक दिलचस्प राजनीतिक मोड़ ले लिया, जब धरना स्थल पर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सुखचंद बेसरा भी पहुंच गए। भाजयुमो के जिलाध्यक्ष को अपनी ही सरकार में सड़क के लिए धरने पर बैठा देख कांग्रेस ने मौके का पूरा फायदा उठाया।
जमीनी हकीकत का जायजा: कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुखचंद बेसरा ने केवल धरना स्थल का दौरा ही नहीं किया, बल्कि वे सड़क की बदहाली देखने सीधे गांव के भीतर तक गए।
विकास के दावों पर सवाल: स्थिति का जायजा लेने के बाद कांग्रेस नेता ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दो टूक शब्दों में तंज कसते हुए कहा कि, “जब सत्ताधारी पार्टी (भाजपा) के अपने नेता की ही मांग पूरी नहीं हो रही है, तो यह सरकार हमारी या आम जनता की क्या सुनेगी?” उन्होंने सरकार के विकास के दावों को पूरी तरह से खोखला करार दिया।
फिलहाल, प्रशासन के आश्वासन के बाद ग्रामीण शांत हो गए हैं, लेकिन करलाकोट की यह बदहाल सड़क अब जिले में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है।





