गरियाबंद। छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा से लगे साहेबिनकछार गांव में वन विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई ने अवैध सागौन तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व और गरियाबंद पुलिस की टीम द्वारा चलाए गए विशेष अभियान में लाखों रुपये मूल्य की अवैध सागौन लकड़ी जब्त की गई है। मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जबकि सात अन्य संदिग्ध फरार बताए जा रहे हैं।
अधिकारियों के अनुसार कार्रवाई की भनक लगते ही तस्करों ने सागौन की लकड़ी को छिपाने के लिए अनोखे तरीके अपनाए। कुछ लकड़ियों को गांव के तालाबों में फेंक दिया गया, जबकि बड़ी मात्रा में लकड़ी घरों की बाड़ियों और खेतों में गड्ढे खोदकर दबा दी गई थी। हालांकि वन विभाग की विशेष स्निफर डॉग ‘टीना’ की मदद से इन छिपे हुए भंडारों का पता लगा लिया गया।
6 लाख रुपये की अवैध सागौन लकड़ी जब्त
संयुक्त टीम ने गांव के विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी कर करीब 4.56 घनमीटर अवैध सागौन लकड़ी बरामद की। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक जब्त लकड़ी की अनुमानित कीमत लगभग 6 लाख रुपये है। इसके अलावा मौके से एक पेट्रोल चालित आरा मशीन और तीन बड़े हाथ आरे भी जब्त किए गए, जिनका उपयोग लकड़ी की अवैध कटाई और प्रसंस्करण में किया जा रहा था।
घरों में मिले महंगे सागौन फर्नीचर
जांच के दौरान अधिकारियों को कुछ आरोपियों के घरों से सागौन की लकड़ी से बने महंगे सोफा सेट और अन्य फर्नीचर भी मिले हैं। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि ओडिशा के तस्करों के साथ मिलकर यहां अवैध फर्नीचर निर्माण और बिक्री का संगठित कारोबार संचालित किया जा रहा था।
वन्यजीव शिकार के सबूत मिलने से बढ़ी गंभीरता
मामला केवल लकड़ी तस्करी तक सीमित नहीं रहा। छापेमारी के दौरान तीन आरोपियों के कब्जे से संरक्षित वन्यजीव साही (Porcupine) के अवशेष, शिकार में उपयोग होने वाले फंदे तथा पोटाश बम भी बरामद किए गए। वन विभाग ने बताया कि ये आरोपी जनवरी 2026 में दर्ज वन्यजीव शिकार मामले में भी संदिग्ध रहे हैं।
वन्यजीव संरक्षण कानूनों के तहत यह बरामदगी मामले को और गंभीर बनाती है। अधिकारियों का मानना है कि तस्करी और वन्यजीव अपराधों के बीच गहरा संबंध हो सकता है, जिसकी जांच की जा रही है।
सात आरोपी फरार, तलाश जारी
वन विभाग ने सात संदिग्धों के खिलाफ सर्च वारंट जारी कर कार्रवाई की थी, लेकिन अधिकांश आरोपी कार्रवाई से पहले ही फरार हो गए। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि फरार आरोपियों की तलाश के लिए लगातार दबिश दी जा रही है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
स्निफर डॉग ‘टीना’ बनी कार्रवाई की हीरो
पूरे अभियान में स्निफर डॉग ‘टीना’ की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। अधिकारियों के अनुसार तालाबों और जमीन के भीतर छिपाकर रखी गई लकड़ी का पता लगाने में टीना ने अहम योगदान दिया। इसकी मदद से टीम उन स्थानों तक पहुंच सकी जहां सामान्य जांच में पहुंचना मुश्किल था।
अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क की आशंका
वन विभाग का मानना है कि यह मामला केवल स्थानीय स्तर की अवैध कटाई का नहीं है। जांच में ओडिशा के तस्करों से जुड़े नेटवर्क के संकेत मिले हैं, जिससे अंतरराज्यीय तस्करी सिंडिकेट की संभावना मजबूत हुई है। विभाग अब वित्तीय लेन-देन, लकड़ी की सप्लाई चेन और जुड़े हुए अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच कर रहा है।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने कहा कि वन संपदा और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। फिलहाल जब्त सामग्री को कब्जे में लेकर मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।



