गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत गरहाडीह आज भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जीवन गुजारने को मजबूर है। आजादी के 79 वर्ष बाद भी पंचायत के कई आश्रित गांव सड़क, पुल-पुलिया, बिजली और मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से मांग किए जाने के बावजूद अब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
ग्रामीणों के अनुसार पंचायत के अधिकांश गांवों तक पहुंचने के लिए आज भी कच्चे रास्तों का सहारा लेना पड़ता है। बरसात के मौसम में ये रास्ते कीचड़ में तब्दील हो जाते हैं, जिससे आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है। ऐसे हालात में मरीजों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कई बार ग्रामीणों को आवश्यक कार्यों के लिए कई किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर होना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत क्षेत्र उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के अंतर्गत होने के कारण सड़क, पुल-पुलिया और बिजली जैसी विकास योजनाओं पर वर्षों से कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी है। हालांकि अब उनकी सबसे बड़ी जरूरत मोबाइल नेटवर्क बन गया है।
मोबाइल नेटवर्क नहीं, आपात स्थिति में भी संपर्क संभव नहीं
गरहाडीह पंचायत के कई गांवों में मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं है। इसके कारण ग्रामीणों का बाहरी दुनिया से संपर्क लगभग कट जाता है। आपातकालीन स्थिति में न तो एम्बुलेंस को समय पर सूचना दी जा सकती है और न ही प्रशासन या स्वास्थ्य सेवाओं से तत्काल संपर्क हो पाता है। विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई और सरकारी योजनाओं की डिजिटल सेवाओं का लाभ लेने में भी परेशानी होती है।
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से भावुक अपील करते हुए कहा, “यदि फिलहाल सड़क, पुल-पुलिया और बिजली उपलब्ध कराना संभव नहीं है, तो कम से कम पंचायत क्षेत्र में मोबाइल टावर ही स्थापित करा दीजिए साहब, ताकि हम भी दुनिया से जुड़े रह सकें।”
ग्रामीणों का कहना है कि डिजिटल युग में संचार सुविधा भी अब एक बुनियादी आवश्यकता बन चुकी है। ऐसे में क्षेत्र में मोबाइल टावर की स्थापना से हजारों लोगों को राहत मिल सकती है। अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन ग्रामीणों की इस मांग पर कब तक सकारात्मक पहल करता है।





