4 साल से अधूरी पड़ी करोड़ों की PMGSY सड़क बनी मुसीबत, 108-112 और 102 तक पहुंचना मुश्किल; जांगड़ा के स्कूली बच्चों की राह भी बंद
मैनपुर। गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड के दुर्गम वनांचल क्षेत्र में सड़क की बदहाली ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मुख्य मार्ग डुमरपड़ाव से ग्राम पंचायत जांगड़ा को जोड़ने वाली प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) की सड़क इन दिनों हुई भारी बारिश के बाद कई हिस्सों में पूरी तरह बदहाल हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से अधूरी पड़ी करोड़ों रुपये की यह सड़क अब बारिश के पानी में बहने जैसी स्थिति में पहुंच गई है।
सड़क की हालत ऐसी हो गई है कि जांगड़ा सहित आसपास के ग्रामीणों का मैनपुर ब्लॉक मुख्यालय और मुख्य मार्ग से सीधा संपर्क प्रभावित हो गया है। बारिश के दौरान कीचड़, पानी और सड़क के कटाव के कारण लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
आपात स्थिति में सबसे बड़ा संकट
सबसे गंभीर स्थिति आपातकालीन सेवाओं को लेकर है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क की खराब स्थिति के कारण 108 एंबुलेंस, 112 आपातकालीन वाहन और 102 जननी एक्सप्रेस जैसे वाहनों की आवाजाही भी मुश्किल हो गई है।
ऐसे में यदि किसी ग्रामीण की तबीयत अचानक बिगड़ती है, गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ती है या किसी दुर्घटना की स्थिति बनती है, तो समय पर स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंचना बड़ी चुनौती बन सकता है।
प्रसव के बाद महिला को घर छोड़ने गई 102 भी फंसी थी
ग्रामीणों ने बताया कि पहली बारिश के दौरान प्रसव के बाद एक महिला को उसके घर छोड़ने गई 102 एंबुलेंस भी इसी मार्ग पर फंस गई थी। उस समय ग्रामीणों ने सड़क की स्थिति को लेकर विभागीय अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया था।
बताया गया कि अधिकारियों की ओर से जल्द सड़क निर्माण कार्य शुरू कराने की बात कही गई थी। लेकिन अब तक सड़क पूरी तरह तैयार नहीं होने से ग्रामीणों की परेशानी बरकरार है।
बच्चों के सामने भी खड़ी हुई बड़ी चुनौती
सड़क की बदहाली का असर विद्यार्थियों पर भी पड़ रहा है। जांगड़ा क्षेत्र के कई बच्चे पढ़ाई के लिए इंदागांव की ओर जाते हैं। बारिश के बाद रास्ते की हालत खराब होने से स्कूल आने-जाने वाले बच्चों के लिए भी यह मार्ग चुनौती बन गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क सिर्फ आवागमन का साधन नहीं है, बल्कि उनके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बाजार तक पहुंच का मुख्य रास्ता है। सड़क खराब होने से इसका सीधा असर रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है।
4.7 किमी सड़क के लिए करोड़ों की स्वीकृति
उपलब्ध जानकारी के अनुसार NH-130C के डुमरपड़ाव से जांगड़ा तक करीब 4.7 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण के लिए लगभग ₹3.02 करोड़ की स्वीकृति का उल्लेख किया गया था। जनवरी 2025 की एक रिपोर्ट में इस सड़क का निर्माण शुरू होने की जानकारी दी गई थी।
वहीं अप्रैल 2026 की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि निर्धारित समय सीमा बीतने के बावजूद सड़क का काम अधूरा था और कई हिस्सों में निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ था। उस रिपोर्ट में 4.70 किमी सड़क के लिए करीब ₹2.37 करोड़ की स्वीकृत राशि तथा दिसंबर 2024 से दिसंबर 2025 तक की कार्य अवधि का उल्लेख किया गया था।
अब सवाल—आखिर कब पूरा होगी सड़क?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि करोड़ों रुपये की सड़क समय पर पूरी हो जाती तो आज बारिश के मौसम में उन्हें इस तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। अब सड़क के कई हिस्सों के क्षतिग्रस्त होने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता, काम की गति और विभागीय निगरानी पर भी सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन मौके का निरीक्षण कर सड़क की वास्तविक स्थिति का आकलन करे, क्षतिग्रस्त हिस्सों को तत्काल दुरुस्त कराया जाए और अधूरे निर्माण को जल्द पूरा किया जाए, ताकि आपातकालीन सेवाओं के साथ-साथ स्कूली बच्चों और आम ग्रामीणों का आवागमन सुचारु हो सके।
PMGSY की सड़कों की जानकारी और शिकायत के लिए केंद्र सरकार के ‘मेरी सड़क’ प्लेटफॉर्म पर भी सड़क संबंधी फीडबैक दर्ज किया जा सकता है।
फिलहाल जांगड़ा के ग्रामीण बारिश के बीच सड़क सुधरने का इंतजार कर रहे हैं। अब देखना होगा कि विभाग इस गंभीर समस्या पर कब तक ठोस कार्रवाई करता है।



