मैनपुर। नहानबिरी में वन विभाग द्वारा वर्षों पूर्व विकसित किए गए सागौन प्लांटेशन की स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है। उचित निगरानी और संरक्षण के अभाव में प्लांटेशन क्षेत्र में अवैध कटाई और अतिक्रमण की गतिविधियां बढ़ती जा रही हैं, जिससे वन विभाग की बहुमूल्य संपदा को भारी नुकसान पहुंच रहा है।
यह क्षेत्र वन विभाग के बिट क्रमांक 1041 (नहानबिरी) के अंतर्गत आता है। जहां पर लाखों रुपये खर्च कर तैयार किए गए सागौन प्लांटेशन की नियमित निगरानी नहीं होने के कारण अतिक्रमणकारी वन भूमि पर कब्जा जमा रहे हैं और सागौन के पेड़ों की कटाई भी जारी है।
सबसे बड़ी बात यह है कि एक ओर उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में उपनिदेशक वरुण जैन के नेतृत्व में वन भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने, वन अपराधों पर अंकुश लगाने तथा अवैध शिकारियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। हाल के वर्षों में हजारों हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने और वन अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी अभियान चलाने से विभाग की सक्रियता दिखाई दी है।
वहीं दूसरी ओर सामान्य वन मंडल क्षेत्र में स्थिति इसके विपरीत नजर आ रही है।आरोप है कि जिन कर्मचारियों और अधिकारियों के कंधों पर वन सुरक्षा की जिम्मेदारी है, वे क्षेत्र में नियमित गश्त और निगरानी करने के बजाय अपने निवास एवं कार्यालयी कार्यों तक सीमित दिखाई देते हैं । सौरभ कोसले (वनकर्मी बिट क्रमांक 1041) चिचिलाती गर्मी से अपने आप को बचा रहे है ? या अतिक्रमणकारियों की मदद कर रहे है ? जिसका सीधा फायदा अतिक्रमणकारियों और वन तस्करों को मिल रहा है।
यदि समय रहते प्रभावी कार्यवाही नहीं की गई तो आने वाले वर्षों में नहानबिरी का सागौन प्लांटेशन पूरी तरह उजड़ सकता है। जिस वन संपदा को तैयार करने में वर्षों का समय और सरकारी धन खर्च हुआ, वह आज लापरवाही और निगरानी की कमी के कारण धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है।
क्षेत्रवासियों ने हमारे खबर के माध्यम से वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि बिट क्रमांक 1041 का तत्काल निरीक्षण कराया जाए, अवैध कटाई और अतिक्रमण की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए तथा वन क्षेत्र में नियमित गश्त सुनिश्चित की जाए।
अब सवाल यह है कि जब एक विभाग का हिस्सा अतिक्रमण और वन अपराधों के खिलाफ लगातार सफलता प्राप्त कर रहा है, तब सामान्य वन मंडल में वन संपदा की सुरक्षा को लेकर ऐसी निष्क्रियता क्यों दिखाई दे रही है? यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में करोड़ों रुपये मूल्य की वन संपदा नष्ट होने का खतरा बना रहेगा।



