गरियाबंद | मैनपुरखुर्द {रिपोर्ट-राधे पटेल }
छत्तीसगढ़ की समृद्ध आदिवासी परंपरा और गौड़ी संस्कृति का प्रतीक बुढ़ालपेन कुंडामिलान (डूमा) जात्रा इस वर्ष 18 वर्षों बाद गोपालपुर (मैनपुरखुर्द) में भव्य रूप से आयोजित की जा रही है।

इस आयोजन में आसपास के करीब 35 गांवों के लोगों को न्यौता दिया गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव और मेला जैसा माहौल बना हुआ है।
मेला जैसा माहौल, उमड़ा जनसैलाब
जात्रा के दौरान गांव में पारंपरिक वेशभूषा, मोहारी,बाजा और निशान की गूंज तथा धार्मिक अनुष्ठानों की झलक देखने को मिल रही है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु और ग्रामीण इस आयोजन में शामिल हो रहे हैं, जिससे गोपालपुर पूरी तरह उत्सवमय हो गया है।

पारंपरिक स्वागत बना आकर्षण का केंद्र
इस आयोजन की एक खास परंपरा यह है कि जैसे ही अतिथि कार्यक्रम स्थल पर पहुंचते हैं, उनका आदिवासी रीति-रिवाजों के अनुसार पीले चावल (अक्षत) से स्वागत किया जाता है।
यह स्वागत गांव की बेटियों द्वारा बड़े ही सम्मान और पारंपरिक ढंग से किया जाता है, जो इस आयोजन की सांस्कृतिक खूबसूरती को और बढ़ाता है।

डूमा मिलान की अनोखी परंपरा
इस जात्रा की सबसे खास परंपरा है “डूमा मिलान”, जिसमें स्वर्गवासी (दिवंगत) परिजनों का प्रतीकात्मक मिलन कराया जाता है।
मिली जानकारी के अनुसार:
- यह मिलन पूरी तरह आदिवासी रीति-रिवाजों के अनुसार होता है
- इसमें विवाह जैसी सभी रस्में निभाई जाती हैं
- हल्दी से लेकर बारात तक की परंपरा पूरी विधि-विधान से की जाती है
- इसके बाद प्रीतिभोज (सामूहिक भोजन) भी कराया जाता है
समाज में यह मान्यता है कि इस पवित्र अनुष्ठान से दिवंगत आत्माओं को शांति मिलती है।

आदिवासी वाध्य यात्रा का विशेष आकर्षण
इस आयोजन में आदिवासी वाध्य यात्रा भी विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
- पारंपरिक वाध्य यंत्रों के साथ यात्रा निकाली जाती है
- इसमें मोहारी, बाजा और निशान प्रमुख रूप से शामिल रहते हैं
- ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में इस यात्रा में भाग लेते हैं
यह वाध्य यात्रा पूरे आयोजन को जीवंत और सांस्कृतिक रंगों से भर देती है।
इस बार ऐतिहासिक बनी भागीदारी
इस वर्ष का आयोजन कई मायनों में खास रहा है।
- 35 गांवों के लोग शामिल हुए
- आदिवासी समाज के साथ-साथ अन्य समाज के लोगों को भी न्यौता दिया गया
इस कारण यह आयोजन सामाजिक समरसता और एकता का प्रतीक बनकर उभरा है।
तीन दिवसीय कार्यक्रम
28 मार्च 2026
- माटी पूजा एवं मड़या
29 मार्च 2026
- पेन विवाह
- बुढ़ादेव पूजा
- डूमा मिलान
30 मार्च 2026
- प्रीतिभोज / सामूहिक भोजन
आयोजन में प्रमुख भूमिका
- पुजारी: तिरू राजकुमार नेताम
- छत्तरिया: तिरू देवसिंह नेताम
- पत्यन्या: तिरू नरहरी पाठ
18 वर्षों बाद आयोजित बुढ़ालपेन कुंडामिलान (डूमा) जात्रा ने गोपालपुर क्षेत्र में नई ऊर्जा भर दी है। पारंपरिक स्वागत, विवाह जैसी रस्में, आदिवासी वाध्य यात्रा और सर्वसमाज की भागीदारी ने इस आयोजन को ऐतिहासिक और यादगार बना दिया है।


