राधे पटेल / मैनपुर गरियाबंद कागजों पर स्कूल तैयार, धरातल पर भ्रष्टाचार के बड़े-बड़े गड्ढे… उजड़ी छतें और बदहाल व्यवस्था के बीच जिन मासूम बच्चों का भविष्य संवरना था, उनके हक का पैसा भ्रष्ट अफसरों की तिजोरी की भेंट चढ़ गया है। “स्कूल जतन योजना” के नाम पर गरियाबंद में एक ऐसा फर्जीवाड़ा हुआ है, जिसे सुनकर किसी के भी होश उड़ जाएं। साहब कागजों पर ही स्कूल की इमारतें ढाल गए।

चौंकाने वाला मामला शासकीय प्राथमिक शाला कुकरार का है। यहां 16 लाख रुपये की लागत से एक नया स्कूल भवन बनना था। आज जमीन पर स्कूल के नाम पर सिर्फ एक काला धब्बा और खुदी हुई नींव मौजूद है। लेकिन सरकारी डायरी का सच हैरान करने वाला है—फाइलों में स्कूल का निर्माण ‘छज्जा लेवल’ तक पहुंच चुका है।
भ्रष्टाचार का मकड़जाल: चार गांव, और 72.60 लाख का गबन

यह खेल सिर्फ कुकरार तक सीमित नहीं रहा। अधिकारियों ने सुनियोजित तरीके से सरकार की आंखों में धूल झोंकते हुए आसपास के गांवों को भी अपने भ्रष्टाचार का शिकार बनाया।
कुकरार: 16 लाख रुपये (सिर्फ नींव खुदी)
हथौड़ाडीह: 20 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा
नगरार: 16 लाख रुपये डकारे गए
जोबपारा: 20 लाख रुपये का गबन

कुल मिलाकर 72.60 लाख रुपये का ऐसा बंदरबांट हुआ है कि किसी ने डकार तक नहीं ली। यह रकम स्कूल की दीवारों पर ईंट बनकर लगने के बजाय सीधे भ्रष्ट अफसरों की जेबों में चली गई।
अभी-अभी: ‘साहब’ के कागजी कारनामे और जांच की आंच
तत्कालीन सहायक आयुक्त नवीन भगत के कागजी कारनामों ने सरकारी राशि के दुरुपयोग की इंतहा कर दी है। फाइलों में जो कहानी रची गई, वह धरातल की सच्चाई से कोसों दूर है। लेकिन अब इस महाघोटाले की भनक प्रशासन को लग चुकी है।
ताजा अपडेट यह है कि तत्कालीन सहायक आयुक्त नवीन भगत अब सीधे तौर पर जांच के घेरे में हैं। वर्तमान सहायक आयुक्त लोकेश्वर पटेल इस पूरे मामले की तह तक जाने में जुट गए हैं। फाइलों की परतें खुलनी शुरू हो गई हैं, और सूत्रों की मानें तो इस 72.60 लाख के घोटाले में आगे कई और बड़े खुलासे होने बाकी हैं।


