गरियाबंद। शिक्षा व्यवस्था के बुनियादी ढांचे को लेकर गरियाबंद प्रशासन ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। जिले में ‘मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना’ (सत्र 2023-24) के तहत स्वीकृत 24 निर्माण कार्यों को बेहद धीमी प्रगति (अल्प प्रगति) के कारण तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। प्रशासन ने संबंधित ठेकेदारों (निविदाकारों) को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए 7 दिनों के भीतर 2 करोड़ 88 लाख रुपये से अधिक की सरकारी राशि वापस लौटाने के निर्देश दिए हैं।
7 दिन का अल्टीमेटम, राशि नहीं लौटाने पर होगी FIR
विभाग की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि संबंधित निविदाकारों को अब तक प्राप्त भुगतान राशि 7 दिन के भीतर अनिवार्य रूप से आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त के खाते में जमा करनी होगी। राशि जमा करने के बाद इसकी विधिवत सूचना कार्यालय को देनी होगी।
यदि निर्धारित अवधि में ठेकेदार यह राशि जमा करने में विफल रहते हैं, तो उनके विरुद्ध वैधानिक वसूली की कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, प्रशासन ने आवश्यकतानुसार थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी है।
किन ठेकेदारों से कितनी होगी वसूली?

आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त श्री लोकेश पटेल ने बताया कि काम में लापरवाही बरतने वाले तीन प्रमुख निविदाकारों से कुल 2 करोड़ 88 लाख 07 हजार रुपये की वसूली की जाएगी। इसका विवरण इस प्रकार है:
| निविदाकार (ठेकेदार) का नाम | संबंधित जिला | निरस्त कार्य | वसूली जाने वाली राशि |
| अजय कुमार राठौर | आर.एस.एस. नगर, कोरबा | 13 | 1 करोड़ 69 लाख 06 हजार रुपये |
| मेसर्स जयनारायण यादव | कोरबा | 08 | 86 लाख 19 हजार रुपये |
| मेसर्स सुनील कंस्ट्रक्शन | महासमुंद | 03 | 32 लाख 82 हजार रुपये |
| कुल योग | 24 कार्य | 2 करोड़ 88 लाख 07 हजार रुपये |
प्रशासन का स्पष्ट संदेश:
इस सख्त कार्रवाई से प्रशासन ने यह साफ संदेश दे दिया है कि सरकारी योजनाओं, विशेषकर स्कूली बच्चों के भविष्य से जुड़े निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की लेटलतीफी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस फैसले के बाद जिले के अन्य निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों में हड़कंप मच गया है। अब देखना यह है कि 7 दिन की दी गई मोहलत के भीतर ये ठेकेदार सरकारी खजाने में राशि जमा करते हैं, या फिर प्रशासन को इनके खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कराना पड़ता है।





