गरियाबंद: डिजिटल युग में जहां इंटरनेट ने बच्चों की शिक्षा और ज्ञान प्राप्ति को बेहद आसान बना दिया है, वहीं इसके दूसरे पहलू के रूप में ऑनलाइन ठगी, साइबर बुलिंग और ब्लैकमेलिंग जैसे गंभीर खतरे भी तेजी से बढ़े हैं। इंटरनेट के इस अंधेरे जाल से नौनिहालों को बचाने के लिए गरियाबंद जिला पुलिस ने एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील पहल करते हुए ‘साइबर बाल रक्षक’ अभियान की शुरुआत की है।
इस अभियान का मूल मंत्र है- “सचेत बच्चा, सुरक्षित भविष्य”, जिसके तहत पुलिस विभाग पूरे जिले में बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक कर रहा है।

हमारा संकल्प: हर बच्चा सुरक्षित, हर परिवार निश्चिंत गरियाबंद पुलिस द्वारा जारी किए गए विशेष जागरूकता पोस्टर में स्पष्ट संदेश दिया गया है कि ऑनलाइन जगत में सुरक्षा अत्यंत जरूरी है । पुलिस प्रशासन का मानना है कि साइबर अपराधों से निपटने का सबसे प्रभावी हथियार तकनीकी ज्ञान से ज्यादा जागरूकता है। इसलिए इस अभियान का मुख्य उद्देश्य एक सुरक्षित डिजिटल समाज का निर्माण करना है, ताकि अभिभावक निश्चिंत रह सकें और बच्चे बिना किसी डर के इंटरनेट का सकारात्मक उपयोग कर सकें।
बच्चों के लिए गरियाबंद पुलिस के 5 सुरक्षा मंत्र गरियाबंद पुलिस ने साइबर अपराधियों (हैकर्स और फ्रॉडस्टर्स) के जाल से बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बच्चों को मुख्य रूप से इन नियमों का पालन करने की सलाह दी गई है:
निजी जानकारी गुप्त रखें: इंटरनेट पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी (Personal Information) जैसे घर का पता, मोबाइल नंबर, या स्कूल की जानकारी किसी के भी साथ साझा न करें।
अजनबियों से दूरी: फेसबुक, इंस्टाग्राम या किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अजनबियों की फ्रेंड रिक्वेस्ट (Friend Requests) बिल्कुल स्वीकार न करें।
संदिग्ध लिंक्स पर क्लिक न करें: व्हाट्सएप, एसएमएस या ईमेल पर आने वाले किसी भी अज्ञात लिंक या लुभावने संदेश (Unknown Links) पर क्लिक करने से बचें, यह हैकिंग का तरीका हो सकता है।
तस्वीरें साझा न करें: अपनी या अपने परिवार की कोई भी निजी फोटो या वीडियो किसी अनजान व्यक्ति को इंटरनेट पर न भेजें।
डरें नहीं, तुरंत बताएं: यदि ऑनलाइन गेमिंग, सोशल मीडिया या इंटरनेट का उपयोग करते समय कोई बात परेशान करे, या कोई धमकी दे, तो डरे बिना तुरंत अपने माता-पिता या शिक्षक को इसकी पूरी जानकारी दें।
तत्काल सहायता के लिए डायल करें ‘1930’ पुलिस विभाग ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें और उनसे मित्रवत व्यवहार करें ताकि बच्चे अपनी परेशानी साझा कर सकें।
यदि किसी बच्चे या आम नागरिक के साथ किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी या अपराध होता है, तो उन्हें घबराने के बजाय तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर सूचना देनी चाहिए। इसके अलावा, पीड़ित नागरिक अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए अपने निकटतम पुलिस थाना या गरियाबंद साइबर सेल से भी सीधा संपर्क कर सकते हैं।
गरियाबंद पुलिस की यह ‘साइबर बाल रक्षक’ पहल निश्चित रूप से जिले के बच्चों को डिजिटल खतरों से ढाल बनकर सुरक्षित रखने में एक मील का पत्थर साबित होगी।





