80 किमी दूर वनांचल गांव में नए भवन की स्वीकृति का इंतजार; निजी खपरैल मकान में संचालित हो रहा केंद्र, बच्चों के पोषण और शुरुआती शिक्षा पर संकट
गरियाबंद जिले के दूरस्थ वनांचल में बच्चों के पोषण और शुरुआती शिक्षा से जुड़ी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मैनपुर विकासखंड मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत मुड़ागांव के आश्रित ग्राम कुंडेरापानी में आंगनबाड़ी केंद्र का सरकारी भवन पिछले चार साल से जर्जर हालत में है। नए भवन की स्वीकृति नहीं मिलने के कारण केंद्र ग्रामीण के निजी खपरैल मकान में संचालित हो रहा है। अब मकान मालिक ने किराया देने या नया भवन बनवाने की मांग करते हुए मकान खाली कराने की चेतावनी दी है।
चार साल से जर्जर भवन, वैकल्पिक व्यवस्था भी संकट में
कुंडेरापानी में आंगनबाड़ी केंद्र के लिए बना सरकारी भवन लंबे समय से उपयोग के लायक नहीं बताया जा रहा है। ऐसे में बच्चों के लिए केंद्र का संचालन गांव के निवासी नाथलू मांझी के निजी मकान में किया जा रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, यह वैकल्पिक व्यवस्था वर्षों से जारी है, लेकिन अब तक नए भवन की स्वीकृति नहीं मिली है।
आंगनबाड़ी केंद्र छोटे बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं और शुरुआती सीखने की गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में सुरक्षित और उपयुक्त भवन का अभाव गांव के बच्चों और केंद्र के संचालन से जुड़ी कार्यकर्ताओं के लिए परेशानी का कारण बन रहा है।
मकान मालिक की दो टूक—किराया दो या भवन बनाओ
ग्रामीण नाथलू मांझी का कहना है कि वे लंबे समय से अपने निजी मकान में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित करने की जगह दे रहे हैं, लेकिन उन्हें विभाग की ओर से किराया नहीं मिला है। अब उन्होंने प्रशासन के सामने दो विकल्प रखे हैं—गांव में नए आंगनबाड़ी भवन की स्वीकृति दी जाए या निजी मकान के बकाया और नियमित किराये का भुगतान किया जाए।
मकान मालिक की चेतावनी के बाद केंद्र के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। यदि मकान खाली करना पड़ा और समय रहते दूसरी व्यवस्था नहीं हुई, तो बच्चों के लिए आंगनबाड़ी संचालन प्रभावित हो सकता है।
दूरस्थ गांव में सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच फासला
मैनपुर के दुर्गम वनांचल में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना प्रशासन के सामने चुनौती हो सकती है, लेकिन चार साल से जर्जर भवन की समस्या बने रहना विभागीय निगरानी और वैकल्पिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों की मांग है कि मामले का निरीक्षण कर भवन निर्माण की स्वीकृति, मरम्मत अथवा किराये के भुगतान पर शीघ्र निर्णय लिया जाए।
सवाल यह भी है कि जब सरकारी भवन उपयोग के लायक नहीं रहा, तब बच्चों के लिए सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित करने और निजी मकान में केंद्र संचालन की औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए?
क्या कहते हैं जिम्मेदार?
जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, गरियाबंद वरुण नागेश के अनुसार, कुंडेरापानी में आंगनबाड़ी भवन की जर्जर स्थिति और निजी मकान में बिना किराये के केंद्र संचालित होने की जानकारी मिली है। उन्होंने मामले को दिखवाकर नियमानुसार आवश्यक कदम उठाने की बात कही है।
अब ग्रामीणों को प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार है। देखना होगा कि निरीक्षण और आश्वासन के बाद कुंडेरापानी के बच्चों को सुरक्षित आंगनबाड़ी भवन मिल पाता है या उन्हें इसी अस्थायी व्यवस्था में रहना पड़ेगा।




