गरियाबंद। छोटे गोबरा एवं गोबरा क्षेत्र के जंगलों में लगी भीषण आग अब विकराल रूप ले चुकी है। जंगल के बड़े हिस्से में आग तेजी से फैल रही है और हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि मुख्य सड़क तक धुएं की मोटी चादर छा गई है। रातभर आग की लपटें आसमान को लाल करती रहीं, लेकिन सवाल यह है कि आखिर वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी अब तक कहां हैं?
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जंगल में आग दोपहर से लगी हुई है, लेकिन आग पर काबू पाने के लिए न तो पर्याप्त संसाधन पहुंचे और न ही कोई ठोस कार्रवाई दिखाई दी। जंगल में मौजूद पेड़-पौधे, वन संपदा और वन्यजीव लगातार आग की चपेट में आ रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या वन विभाग किसी बड़े नुकसान का इंतजार कर रहा है? क्या विभाग की जिम्मेदारी सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है?
ग्रामीणों का आरोप है कि हर साल गर्मियों में जंगलों में आग लगती है, लेकिन वन विभाग की तैयारी हमेशा की तरह नाकाफी रहती है। यदि समय रहते आग पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो आने वाले घंटों में हजारों पेड़ राख में बदल सकते हैं।
धुएं के कारण सड़क पर वाहन चालकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई जगह विजिबिलिटी बेहद कम हो गई है। बावजूद इसके प्रशासनिक स्तर पर स्थिति को लेकर कोई गंभीरता नजर नहीं आ रही।
सवाल जो जनता पूछ रही है…
- क्या विभाग के पास आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन नहीं हैं?
- वन्यजीवों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
- करोड़ों की वन संपदा जलने के बाद जिम्मेदारी कौन लेगा?
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो गोबरा का यह जंगल सिर्फ राख का ढेर बनकर रह जाएगा।


