प्रधान पाठक चित्रसेन पटेल के मार्गदर्शन में हुआ आयोजन; पारंपरिक गीतों पर थिरकीं छात्राएं, नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने की पहल
मैनपुर। छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और पारंपरिक विरासत को सहेजने के लिए शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला देहारगुड़ा की बालिकाओं ने अनूठी पहल की। संकुल केंद्र गिरहोला के अंतर्गत विद्यालय की छात्राओं ने गांव की गलियों में पारंपरिक सुवा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। पारंपरिक लोकगीतों की धुन पर छात्राओं के नृत्य ने पूरे गांव में छत्तीसगढ़ी संस्कृति की छटा बिखेर दी।
कार्यक्रम का आयोजन विद्यालय के प्रधान पाठक चित्रसेन पटेल के मार्गदर्शन में किया गया। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी लोककलाओं, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है।
शिक्षा के साथ संस्कृति और संस्कारों पर जोर

प्रधान पाठक चित्रसेन पटेल ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान देना नहीं, बल्कि बच्चों में अपनी भाषा, संस्कृति, परंपरा और सामाजिक मूल्यों के प्रति जागरूकता विकसित करना भी है। जब बच्चे स्वयं पारंपरिक लोकनृत्य में भाग लेते हैं, तो उनमें आत्मविश्वास, सामूहिकता और अपनी संस्कृति के प्रति गौरव की भावना विकसित होती है।
उन्होंने कहा कि सुवा नृत्य छत्तीसगढ़ की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर है। इसे केवल त्योहारों तक सीमित न रखकर नई पीढ़ी के जीवन का हिस्सा बनाना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपनी परंपराओं को पहचानें और आगे बढ़ाएं।
गांव की गलियों में दिखी लोकसंस्कृति की झलक

आधुनिक और तकनीकी दौर में नई पीढ़ी को पारंपरिक लोककलाओं से जोड़ने का यह प्रयास ग्रामीण क्षेत्र में सराहनीय पहल बनकर सामने आया। छात्राओं की प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि विद्यालय केवल किताबी शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना विकसित करने का माध्यम भी है।
इस आयोजन में प्रधान पाठक चित्रसेन पटेल, ओमप्रकाश वैष्णव, श्रीमती सुरैया टण्वीर, कांतिलाल साहू और प्रेरणा कश्यप का प्रमुख योगदान रहा।


