गरियाबंद जिले के देवभोग ब्लॉक का मामला; गिरसुल के 45, कदलीमुड़ा के 17, माड़ागांव के 20 और डूमरपीटा के 4 हितग्राही सूची में शामिल, अधिकांश ने आवास की राशि दूसरे कामों में खर्च की
देवभोग। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीब परिवारों को पक्की छत उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, लेकिन कुछ हितग्राही योजना की राशि लेने के बाद भी मकान निर्माण शुरू नहीं कर रहे हैं। ऐसा ही मामला गरियाबंद जिले के देवभोग विकासखंड में सामने आया है। यहां प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली किस्त लेने के बावजूद मकान निर्माण नहीं कराने वाले 86 हितग्राहियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
जनपद पंचायत देवभोग की ओर से ऐसे हितग्राहियों की सूची जारी की गई है। जानकारी के अनुसार, अधिकांश हितग्राहियों ने पहली किस्त की राशि निकालकर उसे आवास निर्माण के बजाय दूसरे कार्यों में खर्च कर दिया है। अब संबंधित हितग्राहियों से राशि की वसूली और आवास स्वीकृति निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।

चार गांवों के 86 हितग्राही सूची में शामिल
जनपद पंचायत देवभोग द्वारा जारी सूची में चार गांवों के हितग्राही शामिल हैं। गांववार आंकड़े इस प्रकार हैं:
| ग्राम का नाम | हितग्राहियों की संख्या |
|---|---|
| गिरसुल | 45 |
| कदलीमुड़ा | 17 |
| माड़ागांव | 20 |
| डूमरपीटा | 4 |
| कुल | 86 |
इन सभी हितग्राहियों को योजना के तहत पहली किस्त जारी की गई थी, लेकिन निर्धारित समय में आवास निर्माण की दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई।
पहली किस्त निकाली, लेकिन नहीं बनाया मकान
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हितग्राहियों को चरणबद्ध तरीके से राशि दी जाती है, ताकि वे अपना पक्का मकान बना सकें। लेकिन देवभोग क्षेत्र में सामने आए मामले में आरोप है कि कई हितग्राहियों ने पहली किस्त की रकम निकालने के बाद उसका उपयोग दूसरे कार्यों में कर लिया।
इसके चलते आवास निर्माण अधूरा है या शुरू ही नहीं हो पाया है। योजना के उद्देश्य के विपरीत राशि का उपयोग होने से प्रशासन ने अब सख्ती बरतने की तैयारी की है।
आवास निरस्तीकरण के साथ होगी राशि वसूली
जनपद पंचायत देवभोग द्वारा जारी सूची के आधार पर संबंधित हितग्राहियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसमें आवास स्वीकृति निरस्त करने और सरकारी राशि की वसूली की कार्रवाई शामिल है।
इस कार्रवाई का उद्देश्य योजना की राशि का निर्धारित काम में उपयोग सुनिश्चित करना और पात्र परिवारों को आवास योजना का वास्तविक लाभ पहुंचाना है।
अब देखना होगा कि जनपद पंचायत की कार्रवाई के बाद संबंधित हितग्राही राशि वापस करते हैं या उनके विरुद्ध वसूली की आगे की प्रक्रिया अपनाई जाती है।


