झरगांव स्कूल में पदस्थ विल्शन थॉमस से जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में लिया जा रहा विभागीय काम; डीईओ बोले- EHRMS का काम पूरा होते ही स्कूल लौटेंगे व्याख्याता
मैनपुर । सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने और बच्चों की पढ़ाई सुचारू रखने के लिए शासन स्तर पर शिक्षकों के संलग्नीकरण पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद गरियाबंद जिले में एक संस्कृत व्याख्याता को स्कूल में अध्यापन कराने के बजाय जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में विभागीय काम के लिए रखा गया है। मामला शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय झरगांव का है, जहां पदस्थ संस्कृत व्याख्याता विल्शन थॉमस जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अटैच हैं। इससे एक बार फिर जिले की शिक्षा व्यवस्था और विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
स्कूल में विषय विशेषज्ञ की कमी, कार्यालय में लिया जा रहा काम
जानकारी के अनुसार, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय झरगांव में संस्कृत विषय के व्याख्याता के पद पर विल्शन थॉमस पदस्थ हैं। उन्हें जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में संलग्न कर दिया गया है। आरोप है कि उनसे कार्यालय में लिपिकीय और विभागीय काम लिया जा रहा है।
एक ओर जिले के कई ग्रामीण स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है। कुछ स्कूल एकल शिक्षकीय व्यवस्था में संचालित हो रहे हैं, तो कई जगह विषयवार शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ऐसे में विषय विशेषज्ञ व्याख्याता को स्कूल से हटाकर कार्यालय में काम पर लगाए जाने से शिक्षण व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका है।
डीईओ बोले- EHRMS के काम के लिए बुलाया है
मामले में जिला शिक्षा अधिकारी राजेश चंद्राकर से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि EHRMS (इलेक्ट्रॉनिक ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम) का कार्य पूरा कराने के लिए संस्कृत व्याख्याता को लिखित आदेश देकर कार्यालय बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि EHRMS का काम अब लगभग पूरा हो चुका है और जल्द ही व्याख्याता को उनके मूल पदस्थापना वाले स्कूल में वापस भेज दिया जाएगा।
अब स्कूल वापसी का इंतजार
डीईओ के बयान के बाद अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि व्याख्याता को झरगांव स्कूल में कब तक वापस भेजा जाता है। यदि विभागीय कार्य लगभग पूरा हो चुका है, तो उनकी मूल पदस्थापना पर वापसी में देरी क्यों हो रही है, यह सवाल भी उठ रहा है।
शासन की मंशा है कि शिक्षकों की सेवाएं मुख्य रूप से विद्यार्थियों को पढ़ाने में लगाई जाएं, ताकि स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था मजबूत हो सके। ऐसे में जरूरी है कि विभागीय काम के नाम पर स्कूलों से शिक्षकों को लंबे समय तक दूर न रखा जाए और संबंधित आदेशों का पालन सुनिश्चित किया जाए।


