गरियाबंद। ग्राम पंचायत दबनई के अंतर्गत आने वाले आश्रित ग्राम डडईपानी, खोलापारा समेत करीब पांच अन्य गांवों के आदिवासी, विशेषकर कमार जनजाति के परिवारों के लिए सरकारी राशन हासिल करना किसी चुनौती से कम नहीं है। ग्रामीणों को शासकीय उचित मूल्य की दुकान तक पहुंचने और राशन लेकर वापस लौटने के लिए करीब 10 किलोमीटर तक पहाड़ी और दुर्गम रास्तों का सफर करना पड़ता है।
पहाड़ और जंगल पार कर पहुंचते हैं राशन दुकान
ग्रामीणों के मुताबिक राशन लेने के लिए उन्हें घने जंगल और पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। क्षेत्र हाथी प्रभावित होने के कारण यह सफर और भी जोखिम भरा हो जाता है। जंगली जानवरों की मौजूदगी के बीच ग्रामीणों को राशन के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इन गांवों के लोगों के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली तक पहुंच आसान नहीं है। क्षेत्र में मानव-हाथी संघर्ष की समस्या पहले भी सामने आती रही है। मैनपुर क्षेत्र के हाथी प्रभावित गांवों को लेकर पूर्व में भी ग्रामीणों की मुश्किलें सामने आ चुकी हैं।
सर्वर डाउन होने पर बढ़ जाती है परेशानी
ग्रामीणों की परेशानी केवल लंबी दूरी तक सीमित नहीं है। राशन दुकान पहुंचने के बाद कई बार सर्वर डाउन या तकनीकी समस्या के कारण राशन वितरण प्रभावित होने की बात ग्रामीणों ने कही है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे कई किलोमीटर का सफर तय कर राशन दुकान पहुंचते हैं, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई बार राशन नहीं मिलने पर उन्हें दोबारा इतनी ही दूरी तय करके आना पड़ सकता है।
एक दिन की मजदूरी भी हो जाती है प्रभावित
दूरस्थ गांवों में रहने वाले कई परिवार दैनिक मजदूरी और खेती-किसानी पर निर्भर हैं। ग्रामीणों के अनुसार राशन लेने के लिए आने-जाने में पूरा दिन लग जाता है। ऐसे में उन्हें अपनी रोज की मजदूरी छोड़नी पड़ती है।
ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ करीब 10 किलोमीटर का कठिन सफर, दूसरी तरफ जंगल और हाथियों का खतरा तथा राशन दुकान पर तकनीकी समस्याएं उनकी परेशानी को और बढ़ा रही हैं।
राशन व्यवस्था को स्थानीय स्तर पर आसान बनाने की मांग
ग्रामीणों की मांग है कि दूरस्थ और हाथी प्रभावित गांवों को ध्यान में रखते हुए राशन वितरण की व्यवस्था को स्थानीय स्तर पर आसान बनाया जाए। उचित मूल्य की दुकान की दूरी कम करने या गांवों तक राशन पहुंचाने जैसी व्यवस्था से ग्रामीणों को राहत मिल सकती है।
मानव-हाथी संघर्ष को लेकर भारतीय वन्यजीव संस्थान की 2026 की रिपोर्ट भी बताती है कि हाथी आवासों का विखंडन और मानवीय बस्तियों से बढ़ता दबाव कई क्षेत्रों में संघर्ष की स्थिति को बढ़ा रहा है।
दूरस्थ इलाकों में सरकारी राशन जैसी बुनियादी सुविधा तक पहुंच यदि लोगों के लिए जान जोखिम में डालने और पूरे दिन की मजदूरी गंवाने जैसी स्थिति पैदा कर रही है, तो यह व्यवस्था की पहुंच और जमीनी क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।




