विश्व आदिवासी दिवस पर दिखी समाज की एकजुटता, ‘बूढ़ा पेंटा की जय’ और ‘जल, जंगल, जमीन हमारा है’ के नारों से गूंजा क्षेत्र; ST, SC, OBC एकता के भी लगे नारे
मैनपुर। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर मैनपुर में आदिवासी समाज की एकजुटता और सांस्कृतिक उत्साह देखने को मिला। क्षेत्र के अलग-अलग गांवों से बड़ी संख्या में लोग मैनपुर पहुंचे और पारंपरिक अंदाज में आदिवासी तिहार मनाया। इस दौरान निकाली गई भव्य रैली में युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। रैली के दौरान पूरा मैनपुर आदिवासी एकता के नारों से गूंजता रहा।
रैली में ‘बूढ़ा पेंटा की जय’, ‘जल, जंगल, जमीन हमारा है’ और ‘आदिवासी एकता जिंदाबाद’ जैसे नारे लगाए गए। नारों के जरिए समाज की सांस्कृतिक पहचान, एकजुटता और जल-जंगल-जमीन से जुड़े मुद्दों को लेकर सामूहिक आवाज सामने आई।
ST, SC, OBC एकता का भी दिया संदेश
रैली में आदिवासी समाज की एकता के साथ सामाजिक एकजुटता का संदेश भी देखने को मिला। इस दौरान ‘ST, SC, OBC एकता जिंदाबाद’ के नारे लगाए गए। रैली में शामिल लोगों ने सामाजिक अधिकारों और आपसी एकजुटता को मजबूत करने का संदेश दिया।
पारंपरिक रंग में रंगा मैनपुर
विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर मैनपुर में उत्सव का माहौल रहा। पारंपरिक अंदाज में पहुंचे लोगों और रैली में शामिल समूहों ने आदिवासी संस्कृति और परंपराओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई। रैली के दौरान लगातार गूंजते नारों से मैनपुर की सड़कों पर खासा उत्साह नजर आया।
आयोजन में शामिल लोगों का कहना था कि ऐसे अवसर समाज को अपनी संस्कृति, परंपरा और पहचान से जोड़ने के साथ नई पीढ़ी को भी अपनी जड़ों से परिचित कराने का काम करते हैं।
अधिकार और पहचान की आवाज
विश्व आदिवासी दिवस हर साल 9 अगस्त को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1994 में इस दिन को विश्व के आदिवासी लोगों के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया था। इसका उद्देश्य आदिवासी समुदायों के अधिकारों, संस्कृति और पहचान के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
मैनपुर में आयोजित रैली में भी संस्कृति और सामाजिक एकता के साथ अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज बुलंद होती नजर आई। ‘आदिवासी एकता जिंदाबाद’ के नारों के बीच निकली रैली ने क्षेत्र में समाज की एकजुटता का संदेश दिया।



