मैनपुर ।सरकार ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के दावे कर रही है, लेकिन गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड अंतर्गत गोना उप स्वास्थ्य केंद्र की हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आ रही है। उप स्वास्थ्य केंद्र में न तो डॉक्टर उपलब्ध हैं और न ही कोई स्वास्थ्य कर्मी। परिणामस्वरूप कई दिनों से केंद्र पर ताला लटका हुआ है और इलाज के लिए पहुंचने वाले ग्रामीणों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। कई मरीजों को मजबूरी में मैनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या अन्य स्वास्थ्य संस्थानों का रुख करना पड़ रहा है। यह केंद्र सरकारी स्वास्थ्य सेवा नेटवर्क का हिस्सा है।
ग्रामीणों का कहना है कि मामूली बुखार, प्राथमिक उपचार, दवा वितरण और नियमित स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी उन्हें लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, बच्चों और गंभीर मरीजों को हो रही है। उनका कहना है कि जब जरूरत के समय स्वास्थ्य केंद्र ही बंद मिले, तो सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा करना मुश्किल हो जाता है।
बीएमओ ने बताई केंद्र बंद रहने की वजह
मामले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मैनपुर के बीएमओ डॉ. गजेंद्र ध्रुवे ने बताया,
“उप स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ एक डॉक्टर का बाइक दुर्घटना हो गया था। दुर्घटना के बाद वे मेडिकल लीव पर हैं। वहीं एक अन्य स्वास्थ्य कर्मी वर्तमान में मलेरिया सर्वे एवं टीकाकरण अभियान में ड्यूटी कर रही हैं। इसी कारण फिलहाल उप स्वास्थ्य केंद्र में नियमित सेवाएं प्रभावित हुई हैं और केंद्र बंद है। व्यवस्था को जल्द सामान्य करने का प्रयास किया जा रहा है।”
एक कर्मचारी के अवकाश से पूरी व्यवस्था ठप
ग्रामीणों का कहना है कि यदि एक डॉक्टर के मेडिकल अवकाश पर जाने और दूसरे कर्मचारी के फील्ड ड्यूटी में रहने से पूरा स्वास्थ्य केंद्र बंद हो जाता है, तो यह व्यवस्था की गंभीर कमजोरी को दर्शाता है। उनका सवाल है कि क्या ऐसे हालात के लिए विभाग के पास कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है?
स्थायी समाधान की मांग
ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि गोना उप स्वास्थ्य केंद्र में नियमित डॉक्टर और पर्याप्त स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित की जाए, ताकि लोगों को छोटी-छोटी बीमारियों के लिए भी कई किलोमीटर दूर न जाना पड़े। उनका कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र का भवन तभी सार्थक होगा, जब वहां नियमित रूप से स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों।
अब देखना होगा कि जिला स्वास्थ्य विभाग अस्थायी व्यवस्था से आगे बढ़कर इस समस्या का स्थायी समाधान कब तक कर पाता है।





