छुरा। गरियाबंद जिले के छुरा तहसील क्षेत्र से राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला एक मामला सामने आया है। ग्राम टेंगनाबासा निवासी 75 वर्षीय किसान लालाराम ध्रुव ने अपनी भूमि के कथित फर्जी सीमांकन और प्रशासनिक उदासीनता से नाराज होकर आमरण अनशन की चेतावनी दी है। किसान का आरोप है कि उनकी भूमि का सीमांकन बिना सूचना दिए और राजस्व नियमों का पालन किए कराया गया, जिसके चलते उनकी जमीन पर कब्जा हो गया है।
किसान लालाराम ध्रुव ने तहसीलदार छुरा को दिए आवेदन में बताया है कि उनकी भूमि खसरा नंबर 438, रकबा 0.1000 हेक्टेयर का सीमांकन 5 दिसंबर 2025 को किया गया था। लेकिन सीमांकन की पूरी प्रक्रिया उनके बिना जानकारी के संपन्न कर दी गई। उनका आरोप है कि उन्हें किसी प्रकार की सूचना नहीं दी गई और उनकी अनुपस्थिति में उनके पुत्र को बुलाकर सीमांकन की कार्रवाई पूरी कर ली गई।
सीमांकन पंचनामा में फर्जी हस्ताक्षर का आरोप
किसान ने सीमांकन पंचनामा में गवाहों के कथित फर्जी हस्ताक्षर किए जाने का भी गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि ग्राम के ही एक व्यक्ति ने राजस्व अमले को बुलाकर उनकी भूमि का सीमांकन कराया और बाद में उसी भूमि पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान का निर्माण भी कर लिया गया।
लालाराम ध्रुव का दावा है कि पूरी सीमांकन प्रक्रिया में कई गंभीर अनियमितताएं हुई हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उन्होंने मांग की है कि सीमांकन के दौरान दर्शाए गए गवाहों के बयान दर्ज किए जाएं और वास्तविक स्थिति की जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए।
कई बार आवेदन के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
किसान के अनुसार उन्होंने इस मामले में पहले भी कई बार प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है। 16 फरवरी 2026 और 23 अप्रैल 2026 को पुनः सीमांकन की मांग को लेकर आवेदन प्रस्तुत किए गए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। प्रशासन की निष्क्रियता से निराश किसान ने 11 जून 2026 को फिर से आवेदन सौंपकर एक सप्ताह के भीतर पुनः सीमांकन कराने की मांग की है।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समयावधि में उनकी मांग पूरी नहीं की गई तो वे तहसील कार्यालय छुरा के सामने आमरण अनशन पर बैठ जाएंगे। आवेदन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि अनशन के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना होने पर उसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
मामले को लेकर जब तहसीलदार छुरा मयंक अग्रवाल का पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो समाचार लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी थी। प्रशासन की ओर से जवाब नहीं मिलने के कारण ग्रामीणों और किसान संगठनों में भी नाराजगी देखी जा रही है।
जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसान के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह राजस्व प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। वहीं किसान लालाराम ध्रुव को उम्मीद है कि प्रशासन मामले की निष्पक्ष जांच कर उन्हें न्याय दिलाएगा।




सीमांकन पंचनामा में फर्जी हस्ताक्षर का आरोप
