बिजली के बिना विकास के दावे खोखले
देश आज डिजिटल इंडिया, स्मार्ट गांव और विकास के बड़े-बड़े दावे कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां करती है। क्षेत्र के 53गांव आज भी स्थायी बिजली सुविधा से वंचित हैं। यहां रहने वाले ग्रामीण आज भी अंधेरे में जीवन बिताने को मजबूर हैं। गांवों में बिजली के नाम पर केवल सौर पैनल लगाए गए हैं, लेकिन ये पैनल भी रात में महज दो घंटे तक ही रोशनी दे पाते हैं। इसके बाद पूरा गांव अंधेरे में डूब जाता है।jugad electrification 
आजादी के दशकों बाद भी गांवों में बिजली जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव शासन-प्रशासन के विकास दावों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई वर्षों से वे स्थायी बिजली व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला है।
अंधेरे में सिमट रहा बच्चों का भविष्य
बिजली नहीं होने का सबसे ज्यादा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है। जिन बच्चों को देश का भविष्य कहा जाता है, वही आज अंधेरे में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। सौर पैनल की कमजोर रोशनी कुछ घंटों तक ही साथ देती है, उसके बाद बच्चों की किताबें और सपने दोनों अंधेरे में खो जाते हैं।
ऑनलाइन शिक्षा और डिजिटल पढ़ाई के इस दौर में गांव के बच्चे मोबाइल चार्ज तक नहीं कर पाते। कई छात्र लालटेन और टॉर्च के सहारे पढ़ाई करने को मजबूर हैं। ऐसे में ग्रामीण बच्चों का भविष्य लगातार प्रभावित हो रहा है।
स्वास्थ्य सुविधाएं भी बदहाल
बिजली संकट का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी साफ दिखाई देता है। रात के समय किसी की तबीयत बिगड़ जाए तो इलाज कराना बड़ी चुनौती बन जाता है। पर्याप्त रोशनी और बिजली के अभाव में स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। गर्मी के दिनों में हालात और भी खराब हो जाते हैं।
कई बार सड़कों पर उतर चुके हैं ग्रामीण
क्षेत्रवासी अपनी बुनियादी सुविधाओं को लेकर कई बार सड़कों पर उतर चुके हैं। ग्रामीणों ने प्रदर्शन किए, अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई, लेकिन आज तक उन्हें सिर्फ झूठे वादे ही मिले हैं। शासन-प्रशासन द्वारा हर बार आश्वासन तो दिया गया, मगर समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं हो सका।
ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही गांवों की समस्याएं भी भुला दी जाती हैं।
गांवों के टैक्स से चलता है देश, फिर भी गांव अंधेरे में
कहा जाता है कि देश की आधे से ज्यादा आबादी गांवों में बसती है। गांवों के किसानों, मजदूरों और आम लोगों की मेहनत और टैक्स के पैसों से ही देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। लेकिन विडंबना देखिए कि आज वही ग्रामीण अपने ही घरों में अंधेरे में जीवन जीने को मजबूर हैं।
एक ओर शहरों को चमकाने और स्मार्ट बनाने की योजनाएं चलाई जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर गांव आज भी बिजली जैसी बुनियादी सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह स्थिति कहीं न कहीं विकास के दावों की सच्चाई को उजागर करती है।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र के सभी गांवों में जल्द स्थायी बिजली लाइन बिछाई जाए और नियमित विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि गांव भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकें और बच्चों का भविष्य अंधेरे में जाने से बच सके।



