गरियाबंद। मजबूत इरादे और आत्मविश्वास के दम पर इंसान हर कठिनाई को मात दे सकता है। इसका जीवंत उदाहरण हैं फिंगेश्वर विकासखंड की कुमारी कल्पना भोसले, जिन्होंने 80 प्रतिशत दिव्यांग होने के बावजूद संघर्ष के रास्ते पर आगे बढ़ते हुए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है।
दोनों पैरों से अस्थिबाधित होने के कारण कुमारी कल्पना भोसले व्हीलचेयर का उपयोग करती हैं। शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपने जीवन को दूसरों के लिए प्रेरणा बना दिया। उन्होंने समाज कल्याण विभाग के माध्यम से वर्ष 2018-19 में छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम से स्वरोजगार हेतु 4 लाख 50 हजार रुपये का ऋण प्राप्त किया। इस राशि से उन्होंने “कल्पना मोबाइल सेंटर” की शुरुआत की।

अपने मेहनत और लगन से उन्होंने व्यवसाय को सफल बनाया और समय पर ऋण की सभी किश्तें जमा कर खुद को ऋणमुक्त भी किया। व्यापार में मिली सफलता ने उनके आत्मविश्वास को नई उड़ान दी। इसके बाद उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में कदम रखते हुए विकासखंड फिंगेश्वर के ग्राम बोड़सी में “एकलव्य पब्लिक स्कूल” नाम से अंग्रेजी माध्यम विद्यालय की स्थापना की।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में शुरू हुए इस विद्यालय में वर्तमान में नर्सरी से लेकर कक्षा 10वीं तक की पढ़ाई संचालित की जा रही है। विद्यालय का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को कम शुल्क में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। यही कारण है कि स्कूल में रियायती फीस रखी गई है ताकि गरीब परिवारों के बच्चे भी बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकें।
कुमारी कल्पना भोसले केवल खुद आत्मनिर्भर नहीं बनीं, बल्कि उन्होंने अन्य लोगों को भी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए हैं। उनका जीवन यह संदेश देता है कि यदि आत्मविश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो कोई भी कठिनाई सफलता की राह नहीं रोक सकती।
आज कल्पना भोसले समाज के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। संघर्ष, मेहनत और सेवा भावना से उन्होंने यह साबित कर दिया कि दिव्यांगता किसी व्यक्ति के सपनों को सीमित नहीं कर सकती।


