मध्य प्रदेश में बुधवार को दवा दुकानों पर ताले लटक गए। ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर प्रदेशभर के 41 हजार से ज्यादा मेडिकल स्टोर्स बंद रहे। राजधानी भोपाल में भी इस हड़ताल का बड़ा असर देखने को मिला, जहां करीब 6 हजार मेडिकल दुकानें बंद रहीं।
यह हड़ताल ऑनलाइन दवा बिक्री और नए ड्रग नियमों के विरोध में की गई। केमिस्ट संगठनों का कहना है कि ई-फार्मेसी कंपनियां बिना मजबूत नियामक व्यवस्था के दवाइयों की बिक्री कर रही हैं, जिससे मरीजों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ सकता है।
भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर समेत कई शहरों में मरीजों को दवाइयां लेने में परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोग मेडिकल स्टोर्स के बाहर भटकते नजर आए। हालांकि अस्पतालों के अंदर संचालित मेडिकल स्टोर्स और इमरजेंसी दवा केंद्र खुले रखे गए ताकि गंभीर मरीजों को दिक्कत न हो।
AIOCD के पदाधिकारियों ने बताया कि उनका विरोध मुख्य रूप से ऑनलाइन दवा बिक्री और सरकार द्वारा जारी GSR 220(E) तथा GSR 817(E) नोटिफिकेशन के खिलाफ है। संगठन का आरोप है कि इन नियमों के कारण ऑनलाइन कंपनियों को बिना पर्याप्त निगरानी के दवाएं बेचने की छूट मिल रही है। इससे नकली, एक्सपायर्ड या गलत दवाइयों के पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है।
केमिस्ट संगठनों का कहना है कि दवा केवल व्यापार नहीं बल्कि लोगों की सेहत से जुड़ा विषय है। ऐसे में बिना फार्मासिस्ट की निगरानी के ऑनलाइन दवा सप्लाई गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। वहीं दूसरी ओर ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियां दावा कर रही हैं कि डिजिटल सिस्टम से लोगों को घर बैठे आसानी से दवाइयां उपलब्ध हो रही हैं।
हड़ताल के दौरान कई जिलों में टास्क फोर्स और हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए ताकि जरूरतमंद मरीजों तक आवश्यक दवाइयां पहुंचाई जा सकें।


