राधे पटेल / गरियाबंद“जूता-चप्पल की भाषा” टिप्पणी पर सुशासन तिहार के बहिष्कार का ऐलान, प्रदेशभर में आंदोलन की चेतावनी
गरियाबंद/छुरा। छत्तीसगढ़ में सुशासन तिहार 2026 के बीच अब एक नया विवाद राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में गर्मी पैदा कर रहा है। राजिम विधायक रोहित साहू के कथित “पटवारियों से जूता-चप्पल की भाषा में बात करनी पड़ेगी” बयान ने राजस्व अमले में भारी नाराजगी पैदा कर दी है। बयान सामने आने के बाद तहसील पटवारी संघ छुरा खुलकर विरोध में उतर आया है और सुशासन तिहार के सभी कार्यक्रमों के पूर्ण बहिष्कार का ऐलान कर दिया है।

यह मामला अब केवल एक बयान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे कर्मचारियों के सम्मान और स्वाभिमान से जोड़कर देखा जा रहा है। पटवारी संघ ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि शासकीय कर्मचारियों के साथ इस तरह की भाषा का प्रयोग किया जाएगा, तो इसका विरोध हर स्तर पर किया जाएगा।
आपात बैठक के बाद बड़ा फैसला
ग्राम पटसिवनी में आयोजित कार्यक्रम के बाद तहसील पटवारी संघ छुरा की आपात बैठक बुलाई गई। बैठक में मौजूद पटवारियों ने विधायक के कथित बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे “अपमानजनक और अस्वीकार्य” बताया। लंबे मंथन के बाद सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जब तक मामले में उचित समाधान नहीं निकलता, तब तक पटवारी संघ सुशासन तिहार 2026 के किसी भी कार्यक्रम में भाग नहीं लेगा।
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि पटवारी दिन-रात जनता और शासन के बीच सेतु बनकर काम करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन, नामांतरण, सीमांकन, फसल गिरदावरी और राजस्व संबंधी कार्यों की पूरी जिम्मेदारी पटवारियों के कंधों पर होती है। ऐसे कर्मचारियों के लिए सार्वजनिक मंच से इस तरह की टिप्पणी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
कलेक्टर के नाम सौंपा गया ज्ञापन
विरोध को औपचारिक रूप देते हुए तहसील पटवारी संघ छुरा ने जिला कलेक्टर गरियाबंद के नाम ज्ञापन तैयार कर छुरा एसडीएम विशाल महाराणा को सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि विधायक का कथित बयान न केवल पटवारियों बल्कि पूरे राजस्व विभाग के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने वाला है।
संघ ने प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लिया जाए और कर्मचारियों की गरिमा बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। ज्ञापन की प्रतिलिपि जिला राजस्व पटवारी संघ गरियाबंद, संभागीय अध्यक्ष रायपुर और प्रांतीय राजस्व पटवारी संघ को भी भेजी गई है।
तहसील से प्रदेश तक आंदोलन की तैयारी
पटवारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। फिलहाल छुरा तहसील से शुरू हुआ विरोध आने वाले दिनों में जिला स्तर और फिर पूरे प्रदेश में फैल सकता है। संघ पदाधिकारियों ने कहा कि यह लड़ाई केवल एक कर्मचारी या एक तहसील की नहीं, बल्कि पूरे राजस्व अमले के सम्मान की लड़ाई है।
सूत्रों के मुताबिक प्रदेशभर के कई जिलों में भी पटवारी संगठन इस मुद्दे पर नजर बनाए हुए हैं। यदि विवाद बढ़ता है तो राजस्व कार्य प्रभावित हो सकते हैं, जिससे आम जनता को भी परेशानी उठानी पड़ सकती है।
राजनीतिक गलियारों में भी बढ़ी हलचल
मामले ने अब राजनीतिक रंग भी लेना शुरू कर दिया है। विपक्षी दलों के नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर सरकार और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। वहीं प्रशासनिक हलकों में भी इस घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
सुशासन तिहार को सरकार जनता और प्रशासन के बीच बेहतर संवाद का मंच बताकर प्रचारित कर रही है, लेकिन अब उसी आयोजन के दौरान सामने आए इस विवाद ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
कर्मचारियों का साफ संदेश
पटवारी संघ ने स्पष्ट कहा है कि कर्मचारी शासन के निर्देशों का पालन करते हैं, लेकिन सम्मान और आत्मसम्मान से समझौता नहीं किया जा सकता। संघ का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि ही सार्वजनिक मंच से कर्मचारियों के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करेंगे, तो इससे पूरे प्रशासनिक तंत्र का मनोबल प्रभावित होगा।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में इस विवाद पर विधायक या प्रशासन की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है और क्या यह मामला शांत होता है या फिर प्रदेशव्यापी आंदोलन का रूप लेता है।


