गरियाबंद | News Veb Special Desk:-
छत्तीसगढ़ का गरियाबंद जिला, जो कभी नक्सलियों के ‘धमतरी-गरियाबंद-नुआपाड़ा (DGN) डिवीजन’ का अभेद्य किला माना जाता था, अब पूरी तरह से नक्सल-मुक्त होने की राह पर है। गरियाबंद पुलिस और सुरक्षाबलों के जॉइंट ‘ऑपरेशन विराट‘ ने नक्सलियों की कमर तोड़ कर रख दी है। पुलिस ने न सिर्फ गोलियों से नक्सलियों का जवाब दिया है, बल्कि अब ‘सॉफ्ट पावर’ (सामुदायिक पुलिसिंग) का इस्तेमाल करते हुए युवाओं को रोजगार और साइबर ठगी से बचाने के लिए एक बड़ा जन-जागरूकता अभियान भी छेड़ दिया है।
रिपोर्ट की मुख्य बातें (Key Highlights):

36 नक्सलियों का सरेंडर: 28 मार्च 2012 से 19 जनवरी 2026 तक कुल 36 खूंखार माओवादियों ने मुख्यधारा में वापसी की है ।

35 नक्सली ढेर: पुलिस सर्चिंग और मुठभेड़ों में अब तक 35 नक्सली मारे गए हैं, जिनमें शीर्ष ‘सेंट्रल कमेटी’ के नेता भी शामिल हैं ।

74 हथियारों की जब्ती: नक्सलियों के शस्त्रागार से 74 हथियार और 1.08 करोड़ रुपये से ज़्यादा का कैश बरामद किया गया है ।
जन-जागरूकता अभियान: पुलिस अब गांव-गांव जाकर बेरोजगार युवाओं का डेटाबेस बना रही है और 1930 साइबर हेल्पलाइन का प्रचार कर रही है ।
कैसे टूटा नक्सलियों का सबसे मजबूत ‘थिंक टैंक’?
नक्सल विरोधी अभियानों में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट 25 जनवरी 2024 को आया, जब सिकासेर इलाके में एक मुठभेड़ के बाद पुलिस को नक्सलियों के टॉप लीडर्स के छिपे होने के इनपुट्स मिले। इसके तुरंत बाद, गरियाबंद पुलिस ने E-30, STF, CRPF और CoBRA कमांडोज़ के साथ मिलकर आक्रामक ‘ऑपरेशन विराट’ लॉन्च किया ।
साल 2025 नक्सलियों के लिए सबसे भारी पड़ा। इस एक साल में सुरक्षाबलों ने 28 नक्सलियों को मार गिराया:
जनवरी 2025 का ऐतिहासिक ऑपरेशन: 19 से 23 जनवरी के बीच भालूडिग्गी के पहाड़ों में 72 घंटे तक चली मुठभेड़ में 16 नक्सली मारे गए। इनमें माओवादियों की सेंट्रल कमेटी का मेंबर चलपति (जिस पर 1 करोड़ का इनाम था) भी शामिल था ।
सितंबर 2025 का प्रहार: 11-12 सितंबर को ग्राम मेटाल-भालूडिग्गी इलाके में दोबारा ऑपरेशन चलाया गया, जिसमें सेंट्रल कमेटी के एक और बड़े नेता मोडेम बालाकृष्णना (1 करोड़ का इनामी) सहित 10 नक्सली ढेर हो गए ।
हथियार और 1 करोड़ कैश ज़ब्त; DGN डिवीजन का खात्मा
पुलिस की इस सर्जिकल स्ट्राइक ने नक्सलियों के फाइनेंस और हथियारों के सप्लाई चैन को बुरी तरह तबाह कर दिया। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, गरियाबंद जिले में 74 आधुनिक हथियार (जिनमें 31 ग्रेडेड एके-47 और इंसास शामिल हैं) ज़ब्त किए गए हैं । इसके अलावा 304 इलेक्ट्रिक डेटोनेटर और ₹1,08,81,500 कैश की रिकवरी ने नक्सलियों के अर्थतंत्र को पंगु बना दिया है ।
लगातार हो रहे एनकाउंटर्स और टॉप लीडरशिप के मारे जाने से बौखलाए निचले कैडर के नक्सलियों ने हथियार डालना शुरू कर दिया। गरियाबंद पुलिस के मुताबिक, अब तक कुल 36 संक्रिय माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। इसके साथ ही खूंखार धमतरी-गरियाबंद-नुआपाड़ा (DGN) डिवीजन हमेशा के लिए खत्म हो गया है ।
गोलियों के बाद अब ‘जागरूकता’ की बारी
गरियाबंद पुलिस का मानना है कि उग्रवाद को सिर्फ बंदूकों से नहीं, बल्कि विकास और संवाद से भी खत्म किया जा सकता है। पुलिस कप्तान के कड़े निर्देशों पर जिले के सभी थाना प्रभारियों और बीट आरक्षकों ने अब गांवों और मोहल्लों की कमान संभाल ली है।
1. बेरोजगार युवाओं का तैयार हो रहा डेटा: नक्सली अक्सर गरीबी और बेरोजगारी का फायदा उठाकर युवाओं को बरगलाते हैं। इस चेन को तोड़ने के लिए पुलिस खुद ग्राम और वार्ड स्तर पर बेरोजगार युवक-युवतियों की जानकारी जुटा रही है । मकसद साफ है—युवाओं की पढ़ाई और टैलेंट के हिसाब से उन्हें कौशल विकास योजनाओं और नौकरी के लिए सही गाइडेंस देना।
2. साइबर ठगी पर वार, हेल्पलाइन 1930 का प्रचार: डिजिटल युग में गांव के लोग तेजी से साइबर ठगों का शिकार हो रहे हैं। पुलिस की टीमें गांव वालों और छात्रों को साइबर क्राइम से बचने की ट्रेनिंग दे रही हैं। लोगों को समझाया जा रहा है कि अपना OTP या बैंक डिटेल किसी को न दें। साथ ही, राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन ‘1930’ का तेजी से प्रचार किया जा रहा है ताकि फ्रॉड होने पर तुरंत पैसे ब्लॉक कराए जा सकें ।
3. नशा मुक्ति और ट्रैफिक नियमों की पाठशाला: युवाओं को अपराध और नशे से दूर रखने के लिए पुलिस खास ‘संवाद सत्र’ चला रही है। इसमें नशे के नुकसान और कानूनी कार्रवाइयों के बारे में बताया जा रहा है । साथ ही, सड़क हादसों को रोकने के लिए हेलमेट लगाने और तेज रफ्तार से बचने की अपील की जा रही है
मार्च 2026 तक नक्सल-मुक्त भारत के गृह मंत्रालय के संकल्प को गरियाबंद पुलिस ने हकीकत में बदल दिया है। 35 नक्सलियों का ढेर होना और 36 का मुख्यधारा में लौटना पुलिस की हार्ड पावर का सुबूत है। वहीं, युवाओं के लिए चलाए जा रहे साइबर और रोजगार जागरूकता अभियान यह साबित करते हैं कि पुलिस अब सिर्फ सुरक्षा नहीं दे रही, बल्कि समाज को एक नई और सुरक्षित दिशा भी दिखा रही है। गरियाबंद का यह मॉडल पूरे देश के लिए एक नज़ीर बन चुका है।
स्रोत: स्थानीय प्रशासन, पुलिस विभाग, मीडिया रिपोर्ट एवं News Veb टीम की रिपोर्ट




जन-जागरूकता अभियान: पुलिस अब गांव-गांव जाकर बेरोजगार युवाओं का डेटाबेस बना रही है और 1930 साइबर हेल्पलाइन का प्रचार कर रही है 
