गरियाबंद। जिले में धान खरीदी व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भौतिक सत्यापन के दौरान ढोर्रा और सीनापाली धान उपार्जन केंद्रों में 4,265 क्विंटल धान शॉर्टेज पाए जाने का मामला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि धान की इस भारी कमी से संबंधित समितियों को लगभग 1 करोड़ 32 लाख रुपये की आर्थिक क्षति हुई है। मामले के सामने आते ही जिला प्रशासन और सहकारिता विभाग में हड़कंप मच गया है।
विभागीय जांच में ढोर्रा उपार्जन केंद्र में 2,113 क्विंटल तथा सीनापाली उपार्जन केंद्र में 2,151 क्विंटल धान की कमी दर्ज की गई है। दोनों समितियों को मिलाकर कुल 4,265 क्विंटल धान शॉर्टेज पाया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत 1 करोड़ 32 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है।
90 में से 50 समितियों में मिला धान शॉर्टेज
जिले में संचालित 90 धान खरीदी समितियों के भौतिक सत्यापन के दौरान चौंकाने वाली स्थिति सामने आई है। जांच में लगभग 50 समितियों में धान शॉर्टेज की शिकायतें और अनियमितताएं दर्ज की गई हैं। इनमें ढोर्रा और सीनापाली समितियों में सबसे अधिक धान की कमी पाई गई है, जिसके चलते प्रशासन ने इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
सबसे बड़ा सवाल: आखिर गया कहां करोड़ों का धान?
मामले के सामने आने के बाद सबसे बड़ा प्रश्न यह खड़ा हो गया है कि आखिर 4,265 क्विंटल धान कहां गायब हो गया? क्या यह प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है, या फिर इसके पीछे किसी बड़े गड़बड़ी और भ्रष्टाचार का खेल छिपा है? जिलेभर में इस मुद्दे को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
इतनी बड़ी मात्रा में धान का गायब होना सामान्य त्रुटि नहीं हो सकती। ऐसे में जांच रिपोर्ट आने के बाद कई जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है।
कलेक्टर और सहकारिता विभाग ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला कलेक्टर और सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि सरकारी खरीदी व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अनियमितता या आर्थिक नुकसान को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, संबंधित समितियों के अभिलेखों, स्टॉक रजिस्टरों और परिवहन रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
धान खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता पर उठे सवाल
करोड़ों रुपये मूल्य के धान शॉर्टेज के इस मामले ने जिले की धान खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता और निगरानी तंत्र पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों की मेहनत से उपजा धान यदि खरीदी केंद्रों से ही गायब होने लगे तो यह न केवल सरकारी व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह है, बल्कि किसानों के विश्वास को भी प्रभावित करने वाला मामला है।
अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच पर टिकी हुई है कि आखिर करोड़ों रुपये मूल्य का धान किस तरह गायब हुआ और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है।



