रायपुर। जिले में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग लगातार किसानों को जागरूक करने के साथ ही उन्हें जैविक कृषि पद्धतियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दे रहा है। इसी कड़ी में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की 171 ग्राम पंचायतों में से 160 पंचायतों में जीवामृत के उपयोग से मॉडल किसान फार्म तैयार किए गए हैं। इन मॉडल फार्मों का आसपास के गांवों के किसानों को भ्रमण कराकर जैविक खेती के फायदे और जीवामृत के उपयोग की जानकारी दी जा रही है।
जीवामृत और जैविक खेती पर किसानों को प्रशिक्षण
गौरेला विकासखंड में जीवामृत के उपयोग और जैविक खेती को लेकर व्यावहारिक प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इसमें कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे किसानों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को जीवामृत के उपयोग, मृदा परीक्षण, मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने, जैविक खेती और उन्नत कृषि पद्धतियों के बारे में जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देना ही नहीं, बल्कि खेतों में जैविक तकनीकों के परिणामों को प्रत्यक्ष रूप से दिखाना भी रहा। इसके लिए किसानों को मॉडल फार्मों का भ्रमण कराया जा रहा है, ताकि वे इन पद्धतियों को करीब से समझ सकें।
बृजलाल राठौर के खेत में दिखा जीवामृत का असर
प्रशिक्षण में शामिल किसानों को गौरेला के किसान बृजलाल राठौर के फार्म का भ्रमण कराया गया। यहां म्यूटेंट विष्णुभोग धान की फसल में जीवामृत का उपयोग किया गया है। कृषि विभाग के अनुसार महज 22 दिन की फसल में सुगंध आने के साथ बेहतर वृद्धि देखी गई और फसल में कीट एवं बीमारी का प्रकोप नहीं पाया गया।
खेत में फसल की स्थिति और जीवामृत के उपयोग के परिणाम देखकर किसानों ने जैविक खेती को लेकर रुचि दिखाई। विभाग का प्रयास है कि ऐसे मॉडल फार्मों के माध्यम से किसानों को जैविक कृषि की तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव कराया जाए।
160 पंचायतों में मॉडल फार्म, किसानों तक पहुंचेगी जानकारी
जीपीएम जिले की 171 पंचायतों में से 160 पंचायतों में तैयार किए गए जीवामृत मॉडल फार्म को जैविक खेती के लिए प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण केंद्र के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। किसानों को इन फार्मों का भ्रमण कराकर जीवामृत के उपयोग और जैविक खेती के संभावित लाभों से अवगत कराया जा रहा है।
कृषि विभाग के इस प्रयास से जिले में किसानों के बीच जैविक खेती को लेकर जागरूकता बढ़ाने और मिट्टी की गुणवत्ता को बनाए रखने वाली कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है।


